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Hal Shashti : संतान के कष्ट दूर करने के लिए रखा जाता यह व्रत, बढ़ सकती है सुख-समृद्धि

Hal Shashti Vrat 2026 : भाद्रपद में बहेगी बलराम भगवान की भक्ति की बयार, हलषष्ठी व्रत 2 सितंबर को, संतान रक्षा का पर्व
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भारत

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deepak deewan

Sep 01, 2026

balaram bhakti hal shashthi fast on September 2

बलराम भक्ति का हलषष्ठी व्रत 2 सितंबर को : फोटो सोर्स : AI Grok

Hal Shashti : भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भारतभर में हलषष्ठी मनाई जाती है। कुछ जगहों पर इसे ललई छठ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है ​कि इस दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। उन्हें शेषनाग का अवतार माना जाता है। बलराम का मुख्य शस्त्र हल तथा मूसल है, इसी वजह से उन्हें हलधर भी कहा जाता है। यही कारण है कि बलराम के जन्मोत्सव का नाम हलषष्ठी पड़ा। इस दिन संतान के कष्ट दूर करने की कामना लिए व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हलषष्ठी पर विधिवत पूजा पाठ से सुख-समृद्धि भी बढ़ती है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान बलराम का और अष्टमी तिथि को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। बलराम को हल बहुत प्रिय था इसलिए हलषष्ठी पर हल की पूजा की जाती है। महिलाएं इस दिन संतान प्राप्ति, संतान के सुख और उनकी लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। हलषष्ठी का व्रत करने से संतान के जीवन में चल रहे सभी कष्ट भी दूर होते हैं। वे सुखी और समृद्ध बनते हैं।

हल से जुती यानि जमीन में पैदा होने वाली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए

भगवान बलराम का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस दिन व्रत रखनेवाली माताओं को हल से जुती यानि जमीन में पैदा होने वाली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। हल षष्ठी के दिन कई स्थानों पर महुआ की दातुन और महुआ खाने की भी परंपरा है।

हलछठ में छठी माता की पूजा की जाती है। घर में गोबर से छठी मैय्या की आकृति बनाई जाती है। उन्हें सात अनाज का भोग लगाया जाता है। इसमें जौ, मक्का, धान, गेहूं, चना, मूंग, सेमी और अरहर दाल शामिल हैं। महिलाएं तिन्नी का चावल (पसही या पसई का चावल), महुआ और भैंस के दूध-दही का सेवन करती हैं।

जन्माष्टमी (4 सितंबर): भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म उत्सव के रूप में पर्व मनाया जाता है। इसी दिन मध्यरात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। वैष्णव मंदिरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह पर्व काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं। घरों, मंदिरों में बाल- गोपाल (लड्डू गोपाल) के लिए झूले सजाए जाते हैं।

अधर्म पर धर्म की विजय, निष्काम कर्म का संदेश

भोपाल के विख्यात बांके बिहारी मार्कंडेय मंदिर के पंडित रामनारायण आचार्य बताते हैं कि श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मध्यरात्रि मनाया जाता है। सनातन धर्म में यह पर्व अधर्म पर धर्म की विजय, निष्काम कर्म का संदेश देता है।