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Janmashtami 2026: जानें लड्डू गोपाल को लगाए कौनसा भोग? ज्योतिषाचार्य ने बताई पूजा विधि

Janmashtami Krishna Puja Vidhi: 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य नितिका शर्मा ने बताया कि इस दिन लड्डू गोपाल को कौनसा भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है।
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भारत

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Akash Dewani

Sep 01, 2026

janmashtami laddu gopal bhog krishna puja vidhi

Janmashtami Laddu Gopal Bhog: ज्योतिषाचार्य से जानें पूजा विधि (फोटो सोर्स- Magnific)

Janmashtami Laddu Gopal Bhog: हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami 2026) का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। इस दिन लोग व्रत रखकर और बिना व्रत के भी बड़े उल्लास के साथ भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं। इस बार 15 साल बाद जन्माष्टमी पर ऐसा विशेष संयोग बन रहा है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाएगा। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार जन्माष्टमी पर भी इसी तरह का संयोग बन रहा है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र एवं वृष राशि में मध्य रात्रि में हुआ था।

शास्त्रों में है वर्णन

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि शास्त्रों में इसका विशेष उल्लेख है। ’अर्द्धरात्रे तु रोहिण्यां यदा कृष्णाष्टमी भवेत्। तस्यामभ्यर्चनं शौरिहन्ति पापों त्रिजन्मजम्।’ भविष्य पुराण के इस श्लोक का अर्थात है कि 'अष्टमी तिथि, जन्म समय पर रोहिणी नक्षत्र और हर्षण योग में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत एवं जन्मोत्सव मनाने वाले श्रद्धालुओं के तीन जन्म के पाप समूल नष्ट हो जाते हैं और ऐसा योग शत्रुओं का दमन करने वाला है।

निर्णय सिंधु में भी एक श्लोक आता है-’त्रेतायां द्वापरे चैव राजन् कृतयुगे तथा। रोहिणी सहितं चेयं विद्वद्भि: समुपपोषिता।।’ अर्थात हे राजन्, त्रेता युग, द्वापर युग, सतयुग में रोहिणी नक्षत्र युक्त अष्टमी तिथि में ही विद्वानों ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उपवास किया था इसीलिए कलयुग में भी इसी प्रकार उत्तम योग माना जाए। ऐसा योग विद्वानों और श्रद्धालुओं को अच्छी प्रकार से पोषित करने वाला योग होता है।

जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त और तिथि

पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी पर अबकी बार जयंती योग बना है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी का पर्व उस समय मनाना विशेष शुभ माना जाता है, जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में स्थित हो। इस साल रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत 3 सितंबर की रात 11:30 बजे होगी और यह 4 सितंबर की रात 12:14 बजे तक रहेगा। पंचांग की गणना के आधार पर कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।

अष्टमी तिथि का आरंभ: 3 सितंबर, रात्रि 12:26 मिनट पर
अष्टमी तिथि का समापन: 4 सितंबर, रात्रि 12:14 मिनट पर

मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र का संयोग

जन्माष्टमी की अर्धरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक साथ होना विशेष फलदायी माना जाता है। कई वर्षों में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर वृष राशि में चंद्रमा तो रहता है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन पाता। इस बार सभी प्रमुख ज्योतिषीय तत्व एक साथ आ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं में भी ऐसे संयोग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

जन्माष्टमी का भोग

भगवान लड्डू गोपाल को माखन मिश्री का भोग बहुत पसंद है। इस वजह से जन्माष्टमी वाले दिन बाल श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाएं। इसके अलावा आप केसर वाला घेवर, पेड़ा, मखने की खीर, रबड़ी, मोहनभोग, रसगुल्ला, लड्डू आदि का भोग लगा सकते हैं।

जन्माष्टमी में किस तरह करें पूजा? (Janmashtami Krishna Puja Vidhi)

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि जन्माष्टमी व्रत में अष्टमी के उपवास से पूजन और नवमी के पारण व्रत की पूर्ति होती है। इस व्रत के एक दिन पहले यानी सप्तमी के दिन हल्का और सात्विक भोजन ही करना चाहिए। व्रत वाले दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत होकर सभी देवताओं को नमस्कार करें। पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाएं। हाथ में जल, फल और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें। मध्यान्ह के समय काले तिल का जल छिड़क कर देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाएं।

अब इस सूतिका गृह में सुंदर सा बिछौना बिछाकर उस पर कलश स्थापित करें। भगवान कृष्ण और माता देवकी जी की मूर्ति या सुंदर चित्र स्थापित करें। देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा और लक्ष्मी जी का नाम लेते हुए विधिवत पूजन करें। यह व्रत रात 12 बजे के बाद ही खोला जाता है। इस व्रत में अनाज का उपयोग नहीं किया जाता। फलाहार के रूप में कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मावे की बर्फी और सिंघाड़े के आटे का हलवा खा सकते हैं।