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Ketu Gochar 2026 in Leo to Cancer : केतु गोचर से सिंह राशि को दिसंबर 2026 में मुक्ति, ज्योतिषी ने बताए ये उपाय

Ketu Gochar 2026 in Leo to Cancer : 5 दिसंबर 2026 को केतु सिंह राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इस परिवर्तन से सिंह राशि के जातकों को राहत मिलेगी। जानें केतु गोचर 2026 का ज्योतिषीय प्रभाव, शुभ-अशुभ परिणाम और लाभदायक मंत्र।

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Nov 10, 2025
Ketu Gochar 2026 in Leo to Cancer : केतु गोचर 2026 से सिंह राशि वालों की मुश्किलें होंगी खत्म (फोटो सोर्स: AI image@Gemini)

Ketu Gochar 2026 in Leo to Cancer : वैदिक ज्योतिष में केतु ग्रह को एक रहस्यमयी और गूढ़ ग्रह माना जाता है। तकनीकी रूप से यह एक छाया ग्रह होने के बावजूद, इसका अत्यधिक महत्व है। केतु व्यक्ति को गहन और गंभीर विचार प्रक्रियाएं प्रदान करता है। केतु से प्रभावित लोग अक्सर आध्यात्मिक और धार्मिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति करते हैं।

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केतु का सिंह राशि में गोचर Ketu Transit Leo 2026

वैदिक ज्योतिष में, केतु, जिसे चंद्रमा का दक्षिण नोड माना जाता है, एक छाया ग्रह है जो आध्यात्मिकता, वैराग्य और कर्म संबंधी प्रभावों से जुड़ा है। ज्योतिष के अनुसार, 5 दिसंबर 2026 को केतु सिंह राशि से निकलकर कर्क राशि में चला जाएगा। इस बदलाव से सिंह राशि वालों को काफी राहत मिलेगी, क्योंकि अब तक जो परेशानियां चल रही थीं, वे धीरे-धीरे खत्म होने लगेंगी। साल 2026 में राहु, केतु, बृहस्पति और शनि इन चार बड़े ग्रहों के राशि बदलने से सभी राशियों के जीवन में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। कुछ लोगों के लिए ये समय शुभ रहेगा, तो कुछ को थोड़ी सावधानी बरतनी पड़ेगी।

केतु गोचर 2026 की बात करें तो, केतु वर्ष 2026 के अधिकांश समय सिंह राशि में ही रहेगा। केतु के गोचर के प्रभावों के संबंध में आमतौर पर यह माना जाता है कि जब केतु किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में ग्यारहवें, छठे या तीसरे भाव से होकर गुजरता है, तो यह सकारात्मक परिणाम लाता है। बारहवें भाव में स्थित होने पर, केतु को आध्यात्मिक मुक्ति या मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। आगामी केतु गोचर 2026 कर्क राशि में व्यक्तियों को अलग-अलग रूप से प्रभावित करेगा, जो उनकी जन्म कुंडली में कर्क राशि के किस भाव में स्थित है, इस पर निर्भर करेगा। यह गोचर चुनौतियां लेकर आएगा या नए अवसर, यह उस स्थिति पर निर्भर करेगा।

इन मंत्रों के जाप से मिलेगा फायदा

विष्णु मंत्र

ॐ नमोः नारायणाय॥

विष्णु भगवते वासुदेवाय मन्त्र
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥

ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया, लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।

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Updated on:
10 Nov 2025 04:10 pm
Published on:
10 Nov 2025 04:09 pm
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