2026 और विक्रम संवत 2083 अनुशासन, ईमानदारी और कर्म का साल है। गलत आदतें छोड़कर सही दिनचर्या अपनाने से यह वर्ष सुख, समृद्धि और सफलता दिला सकता है।
नया साल 2026 और विक्रम संवत 2083 नई ऊर्जा, नए नियम और नए कर्मों का संदेश लेकर आ रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह वर्ष बेहद खास है, क्योंकि विक्रम संवत 2083 के राजा गुरु महाराज (बृहस्पति) और मंत्री मंगल महाराज होंगे, वहीं 2026 का राजा सूर्य माना जा रहा है। सूर्य, गुरु, शनि, राहु और केतु—इन सभी ग्रहों की चाल मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालेगी। ऐसे में 2026 शुरू होने से पहले कुछ आदतों को बदलना और कुछ गलतियों से बचना बेहद जरूरी है।
यह वर्ष ज्ञान, नेतृत्व, आत्मबल और कर्मनिष्ठा का है। शनि महाराज मीन राशि में रहकर कई राशियों की परीक्षा लेंगे, वहीं राहु-केतु भ्रम तोड़कर अध्यात्म और सच्चे ज्ञान की ओर ले जाएंगे। गुरु महाराज बड़े फैसलों में विवेक और फ़िल्टर लगाने की सीख देंगे। भावनाओं पर चंद्र का प्रभाव भी बढ़ेगा, इसलिए जल्दबाजी और अहंकार से लिए गए निर्णय नुकसान दे सकते हैं।
इस साल आलस, देर रात जागना, सूर्योदय के बाद उठना और बिना सोचे-समझे फैसले लेना भारी पड़ सकता है। ओवर कॉन्फिडेंस, झूठ, गलत संगति, जरूरत से ज्यादा कर्ज और घर में वाद-विवाद से बचना जरूरी है। सूर्य का साल होने के कारण अहंकार त्यागना और पिता तथा गुरुजनों का सम्मान करना विशेष फल देगा।
2026 को शुभ बनाने के लिए सूर्योदय से पहले उठने की आदत डालें और तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करें। पूरे साल विष्णु सहस्रनाम, आदित्य हृदय स्तोत्र, राम-नाम जप और पीली वस्तुओं का दान लाभकारी रहेगा। हल्दी का तिलक, पीले-सुनहरे वस्त्र, शनिवार को जरूरतमंदों को दान और रविवार-गुरुवार का व्रत शुभ फल देगा।
यह साल रियल एस्टेट, प्रॉपर्टी, विवाह और करियर में नई शुरुआत के योग बना रहा है। शुक्र की ऊर्जा के कारण मां लक्ष्मी की कृपा भी मिल सकती है। शुक्रवार को सफेद वस्तुओं का भोग, लक्ष्मी-दुर्गा मंदिर में प्रसाद और विवाहित स्त्रियों को सम्मान देना सौभाग्य बढ़ाएगा।