Rang Panchami 2026: रंग पंचमी होली महोत्सव की अंतिम तिथि मानी जाती है, इस दिन हवा में रंग और गुलाल उड़ाया जाता है...
Rang Panchami 2026: फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर देवी-देवताओं संग होली मनाई जाती है। उसके पांच दिन बाद यानी पंचमी तिथि को रंग पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। रंग पंचमी को देवी-देवताओं की होली कहा जाता है,ऐसा माना जाता है कि सनातन धर्म में रंग पंचमी की तिथि को भगवान रंग खेलते हैं।
रंग, उमंग और आस्था से जुड़ा रंग पंचमी का यह पावन पर्व इस बार साल 2026 में 8 मार्च वार रविवार को मनाया जाएगा, मुख्य रूप से रंग पंचमी के त्यौहार को मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। इस दिन देवी देवताओं के साथ होली खेलने पर विशेष सुख समृद्धि और वैभव का आशीर्वाद मिलता है।
होली के पांचवें दिन रंग पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है, इस दिन घरों में विशेष प्रकार का भोजन भी बनाया जाता है, महाराष्ट्र में पूरनपोली बनाई जाती है, इसके साथ ही मीठे- पीले चावल या केसरिया भात बनाए जाते है, खीर बनाई जाती है।
देवताओं के साथ रंग, गुलाल, अबीर खेला जाता है ऐसी मान्यता है कि इस दिन शरीर पर रंग नहीं लगाया जाता है बल्कि रंग को हवा में उड़ाया जाता है, इसके पीछे यह मान्यता है कि जब रंग हवा में उड़ता है तब तमोगुण और रजोगुण का नाश होता है, इनके नाश होने से सतोगुण में वृद्धि होती है, चारो ओर वातावरण में उड़ाया हुआ रंग जब आकाश से वापस नीचे गिरता है तो उसे देवताओं का आशीर्वाद माना जाता है।
रंग पंचमी को होली महोत्सव का अंतिम दिन कहा जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी को रंग लगाया जाता है, इस दिन कृष्ण ने राधा के साथ होली खेली थी इसलिए मंदिरों में और घरों में राधा-कृष्ण को रंग अर्पित कर उनके साथ होली खेली जाती है। भगवान कृष्ण और भगवान विष्णु को पीला रंग अर्पित किया जाता है पीले रंग के वस्त्र पहने जाते हैं महालक्ष्मी, बजरंगबली और भैरव महाराज को लाल रंग अर्पित किया जाता है, मां बगलामुखी को पीला रंग अर्पित करते हैं सूर्यदेव को लाल रंग या सिंदूर अर्पित किया जाता है, शनि देव को नीला रंग अर्पित किया जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार होलाष्टक के दिन भगवान शिव ने जब कामदेव को भस्म कर दिया था तब पूरे देवलोक में उदासी छा गई सभी देवी देवता चिंतित हो गए के बिना कामदेव के किस तरह संसार को चलाया जाए तब सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना की भगवान भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर प्रार्थना को स्वीकार कर लिया और कामदेव को जीवित करने का आश्वासन दिया ऐसा करने से पूरे देवलोक में देवता गण आनंदित हो गए और रंग उत्सव मनाने लगे तभी से हर साल चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी का उत्सव मनाया जाता है।
इस बार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 7 मार्च 2026 शाम 7:17 पर होगी तिथि की समाप्ति 8 मार्च 2026 वार रविवार को रात 9:10 पर होगी उदया तिथि के अनुसार रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।
प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करने के बाद सूर्य नारायण भगवान को जल अर्पण करें। गंगाजल से भगवान को भी स्नान कराएं, एक चौकी यानी लकड़ी का पाटा बिछाकर उस पर पीला कपड़ा बिछाए उसे ईशान कोण या उत्तर दिशा में रखें और उस पर गणेश के साथ ही लक्ष्मी नारायण की फोटो रखें , चौकी पर कलश रखें और उसमें आम के पत्ते रखें, नारियल रखें, रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, अबीर, गुलाल, फल, धूप- दीप से पूजा करें। भगवान को खीर का या पीले चावल का भोग लगाएं, साथ ही पंचामृत चढ़ाएं और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और ओम श्रीं श्रीये नमः मंत्र का जाप करें।
भारत के विभिन्न प्रांतों में रंग पंचमी का त्योहार कैसे मनाया जाता है आइए जानते है। राजस्थान के नाथद्वारा में श्रीनाथजी की झांकी निकाली जाती है,चारों ओर रंग हवा में उड़ाया जाता है। इसके अलावा राजस्थान में लाल, नारंगी और फिरोजी रंग को हवा में उड़ाने की परंपरा है, यहां जैसलमेर के मंदिर महल में लोक नृत्य से सरोबार वातावरण देखने को मिलता है।
मध्यप्रदेश में रंग पंचमी पर बड़ी-बड़ी गैर का आयोजन किया जाता है, जिसमें सड़कों पर रंगों से खुला हुआ सुगंधित जल छिड़का जाता है सूखे रंगों से होली खेल कर एक-दूसरे पर रंग डाला जाता है। मध्यप्रदेश के मालवा अंचल में आदिवासी इलाकों में भगोरिया धूमधाम से मनाया जाता है। श्रीखंड, भजिए, आलू बड़े और भांग की ठंडाई बनाई जाती है। मध्यप्रदेश के इंदौर में जुलूस निकाला जाता है, बड़े-बड़े टैंकरों में रंगीन पानी भरकर जुलूस के तमाम रास्ते पर लोगों पर रंग डाला जाता है, जिसमें सभी धर्म के लोग शामिल होते हैं।
वहीं उत्तर प्रदेश में रंग पंचमी के दिन बाराबंकी में सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर होली खेली जाती है, जहां हिंदू मुस्लिम एकता का परिचय देखने को मिलता है। इस दिन उत्तर प्रदेश में बेसन की सेव और दही बड़े बनाए जाते हैं ठंडाई बनाई जाती है।
छत्तीसगढ़ में भी रंग पंचमी मनाई जाती है, छत्तीसगढ़ के जांजगीर से 45 किलोमीटर दूर गांव जांजगीर में कुंवारी कन्याएं गांव में घूम घूम कर पुरुषों पर लाठी बरसाती है, ये परंपरा लगभग तीन सौ सालो से चली आ रही है।