षटतिला एकादशी पर तिल के छह प्रयोग, व्रत और विष्णु पूजा से शनि दोष, कर्ज और पापों से मुक्ति मिलती है। यह एकादशी सुख, शांति और मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार षटतिला एकादशी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय तिथि मानी जाती है। एस्ट्रो तक पर आचार्य अश्विनी मंगल के अनुसार इस एकादशी का नाम ही इसके महत्व को दर्शाता है, क्योंकि इस दिन तिल (Sesame Seeds) का छह अलग-अलग तरीकों से उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत और पूजा से पापों का नाश होता है, कर्ज और बाधाएं दूर होती हैं और अंततः विष्णु कृपा से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस एकादशी को Shattila Ekadashi इसलिए कहा जाता है क्योंकि तिल का प्रयोग छह रूपों में किया जाता है—
तिल जल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल से तर्पण, तिल का सेवन और तिल का दान।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिल शनिदेव का कारक है, इसलिए इस दिन तिल का दान करने से शनि दोष शांत होता है और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं।
प्रातःकाल स्नान के बाद भगवान विष्णु जी की पूजा करें। पुष्प, धूप, दीप और तुलसी अर्पित करें। इस दिन व्रत रखना अत्यंत फलदायी माना गया है। रात्रि में जागरण और हवन करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। अगले दिन द्वादशी को स्नान के बाद विष्णु जी को भोग लगाएं, ब्राह्मणों को भोजन कराएं और फिर स्वयं भोजन करें।
मेष राशि के जातक तुलसी पूजन और चूरमे का प्रसाद वितरित करें।
वृष राशि वाले “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप और दूध का दान करें।
मिथुन राशि के लिए “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र लाभकारी रहेगा।
कर्क राशि के जातक विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
सिंह राशि को क्रोध और अहंकार से बचना चाहिए।
कन्या राशि गणेश-लक्ष्मी पूजन करें।
तुला राशि द्वादशी को चावल सेवन करें, एकादशी को नहीं।
वृश्चिक राशि तांबे के पात्र का दान करें।
धनु और मीन राशि के लिए पीले वस्त्र और गेहूं का दान शुभ रहेगा।
मकर और कुंभ राशि शनिदेव और विष्णु जी की विशेष आराधना करें।