17 February Surya Grahan 2026 Safety: साल 2026 का सूर्य ग्रहण भले ही भारत में दिखाई न दे, लेकिन परंपराओं के कारण खासकर गर्भवती महिलाओं को लेकर कई घरों में चिंता बनी रहती है। ऐसे में जरूरी है कि आस्था, विज्ञान और सावधानी तीनों को संतुलित नजरिए से समझा जाए।
Surya Grahan 2026, Pregnant Women Eclipse Precautions: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण भले ही भारत में दिखाई न दे, लेकिन इसे लेकर जिज्ञासा और सावधानियों की चर्चा हर जगह हो रही है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब ग्रहण दृश्य ही नहीं होगा, तो क्या किसी प्रकार की सावधानी बरतना जरूरी है? न
धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक विश्वासों और आधुनिक चिकित्सा दृष्टिकोण के बीच संतुलन बनाते हुए यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऐसे खगोलीय घटनाक्रम के दौरान क्या करें और क्या न करें। आइए जानते हैं कि इस ग्रहण के समय प्रेग्नेंसी में किन बातों का ध्यान रखना समझदारी भरा कदम हो सकता है।
धार्मिक मान्यताओं में कहा जाता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। गर्भवती महिला का शरीर संवेदनशील होता है, इसलिए परिवार के बड़े-बुजुर्ग उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। शास्त्रों में भी ग्रहण के समय संयम, जप-तप और घर के भीतर रहने की बात कही गई है।लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है। इसका सीधा प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है, ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। जब ग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा, तो उसके प्रभाव को लेकर डरने की आवश्यकता भी नहीं है।
ग्रहण के दिन सकारात्मक मानसिक स्थिति बनाए रखना गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे समय में ध्यान, प्रार्थना या मंत्र जप करने से मन शांत रहता है और अनावश्यक डर या तनाव कम हो सकता है। धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी मानसिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक माना जाता है। कई परंपराओं में सूर्य ग्रहण के अवसर पर गुड़, गेहूं आदि का दान करने की भी सलाह दी जाती है, जिसे शुभ फलदायी माना जाता है। साथ ही सूर्य मंत्रों का जप करने से नकारात्मक विचारों से दूरी बनाकर मन में आत्मविश्वास और संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
कई परिवार आज भी ग्रहण से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं का पालन करते हैं। आस्था के आधार पर गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे ग्रहण के दौरान घर से बाहर न निकलें, खिड़की-दरवाजे बंद रखें और सुई, कैंची या चाकू जैसी नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करें। कुछ लोग इस समय भोजन पकाने या खाने से भी मना करते हैं, हालांकि फल और तरल पदार्थ लेने की अनुमति देते हैं। साथ ही दिन में सोने से बचने की भी हिदायत दी जाती है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि ये सभी बातें धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं और इनके समर्थन में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।