क्रोध जीवन की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। ज्योतिषीय कारणों को समझकर और सही उपाय अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन में शांति, संतुलन और सफलता पा सकता है।
मानव जीवन में क्रोध एक ऐसी कमजोरी है, जो धीरे-धीरे स्वभाव बन जाती है। जरूरत से ज्यादा गुस्सा न केवल रिश्तों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि व्यक्ति के करियर, स्वास्थ्य और सम्मान को भी प्रभावित करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, क्रोध केवल मानसिक आदत नहीं है, बल्कि ग्रहों की असंतुलित स्थिति का परिणाम भी होता है। आइए जानते हैं कि कुंडली में क्रोध क्यों आता है और इसे कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।
चंद्रमा का कमजोर होना
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है।
यदि ऐसे चंद्रमा पर मंगल या सूर्य का प्रभाव हो जाए, तो क्रोध और अधिक बढ़ जाता है।
मंगल अग्नि तत्व का ग्रह है और यह साहस के साथ-साथ आक्रामकता भी देता है।
तो व्यक्ति सामान्य से अधिक क्रोधी हो जाता है।
यदि मंगल के साथ शनि या सूर्य जुड़ जाएं, तो व्यक्ति झगड़ा, मारपीट और हिंसा की ओर बढ़ सकता है।
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार भी क्रोध की पहचान की जा सकती है—
ऐसे लोग गुस्से में खुद को और दूसरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
यदि आपको अत्यधिक गुस्सा आता है, तो इन उपायों को अपनाएं—
इन उपायों से चंद्रमा मजबूत होता है और मंगल की उग्रता कम होती है।