
Makar Sankranti 2026 (PC: GEMINI GENERATED)
भारत में मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सूर्य, कर्म और पितरों से जुड़ा एक विशेष आध्यात्मिक अवसर है। इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। ज्योतिष और धर्म में उत्तरायण को अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसे में मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाना और खिचड़ी का दान करना क्यों जरूरी माना जाता है—इसका उत्तर हमारे शास्त्रों, कर्म सिद्धांत और पितृ परंपरा में छिपा है।
मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष के अनुसार मकर राशि कुंडली का दशम भाव होती है, जिसे कर्म भाव कहा जाता है। जब सूर्य इस भाव को सक्रिय करते हैं, तो व्यक्ति के कर्म, मेहनत और कार्यक्षेत्र पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
इसी कारण उत्तरायण के छह महीने पुण्य काल माने गए हैं। इस दौरान किया गया दान, स्नान, जप, यज्ञ और पूजा कई गुना फल देने वाला माना जाता है।
मकर संक्रांति को कई जगह खिचड़ी संक्रांति भी कहा जाता है। इस दिन खिचड़ी खाई भी जाती है और दान भी की जाती है। खिचड़ी में चावल, दाल, तिल, घी जैसे तत्व होते हैं, जो सूर्य से जुड़े माने जाते हैं और शरीर को ऊर्जा देते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन खिचड़ी का दान करने से कर्म दोष शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
भगवान सूर्य को पितृ देवता भी कहा जाता है। हमारे पिता, पितामह, प्रपितामह और मातृ पक्ष के पूर्वज—सभी पितृ कहलाते हैं। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन यदि खिचड़ी का दान किया जाए, तो पितृगण तृप्त होते हैं और अपने वंश को आशीर्वाद देते हैं।
इससे घर में सुख-शांति, आर्थिक उन्नति और खुशहाली आती है।
खिचड़ी दान से कर्म मजबूत होते हैं, पितृ दोष से राहत मिलती है और सूर्य दोष शांत होता है। यह दान विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ माना जाता है, जिनके जीवन में बार-बार रुकावटें आ रही हों या मेहनत के अनुसार फल न मिल रहा हो।
Updated on:
07 Jan 2026 08:04 pm
Published on:
07 Jan 2026 08:04 pm
