प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया की जनाक्रोश रैली के जरिए शिवपाल सिंह यादव न सिर्फ अपनी ताकत का नजारा पेश करेंगे बल्कि कई रिकॉर्ड भी तोड़ेंगे।
लखनऊ. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया की जनाक्रोश रैली के जरिए शिवपाल सिंह यादव न सिर्फ अपनी ताकत का नजारा पेश करेंगे बल्कि कई रिकॉर्ड भी तोड़ेंगे। उनके एक बयान ने इस बात को पक्का कर दिया है और जिस तरह की तैयारियां दिख रही हैं, उससे यही प्रतीत हो रहा है कि रामाबाई मैदान में रविवार को पैर रखने की जगह तक नहीं होगी।
5 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद-
शिवपाल यादव ने एक बयान में कहा कि इस रैली में लाखों लोग जुटेंगे और अपने आप में यह एक ऐतिहासिक रैली होगी। माना जा रहा है कि रामाबाई मैदान में होने वाली प्रसपा (लोहिया) की जनाक्रोश रैली में 5 लाख लोगों के शामिल होंगे और शिवपाल यादव के लिए यह आंकड़ा छूना कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने जब से समाजवादी पार्टी से अलग होकर प्रसपा लोहिया का गठन किया है तब से यूपी के हर जिले में उनका संगठन लगातार मजबूत हो रहा है। पार्टी के सभी जिलाध्यक्ष कार्यकर्ताओं व समर्थकों को एकजुट कर इस रैली में इकट्ठा करने में जुटे हुए हैं। उनकी पार्टी में कई समाजवादी पार्टी के नेता और समर्थकों के शामिल होने के बाद लोगों की संख्या में खूब इजाफा हुआ है। अन्य दलों के लोग में उनके साथ आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में लोगों को लाने के लिए कारें व बसों का इंतजाम किया गया है। लखनऊ समेत कई जिलों की सड़के शिवपाल की रैली को लेकर बने पोस्टरों व बैनरों से पटे पड़े हैं।
टूट सकता है राजा भैया-मायावती का रिकॉर्ड-
अब इंतजार है तो बस रविवार का जब शिवपाल यादव की सबसे महत्वकांक्षी रैली में लोगों का आना शुरू होगा। माना जा रहा है कि इस रैली से शिवपाल रामाबाई मैदान में हुई पिछली कई बड़ी रैलियों का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। इसमें कुंडा के विधायक राजा भैया की जनसभा भी शामिल है जिसमें करीब 2 लाख लोगों के शामिल होने से सभी दलों में हड़कंप मच गया था। शिवपाल भले ही राजा भैया को नई पार्टी बनाने के लिए शुभकामनाएं देते हुए व समान विचारधारा वाला बता रहे हों, लेकिन रैली में वो उनसे आगे जरूर निकलना चाहेंगे। वैसे राजा भैया की जनसभा ने पूर्व में मायावती का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया था। सुभासपा अध्यक्ष व यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी यहां जनसभा हुंकार भरी थी, लेकिन इतनी भारी भीड़ जुटाने में वे भी नाकामयाब रहे थे। अभी तक पीएम मोदी इस मामले में सबसे आगे हैं, जिनकी यहां सनसभा में लोगों का हुजूम देखने लायक था।