औरैया

दरोगा की ट्रेन से गिरकर दर्दनाक मौत… चलती ट्रेन में चढ़ने के दौरान हुआ हादसा, परिवार में मचा कोहराम

स्टेशन पर ट्रेन का स्टॉपेज नहीं था। लेकिन ट्रेन धीमी होने के कारण दरोगा ट्रेन पर चढ़ने लगे। अचानक संतुलन बिगड़ने से वह गिर गए। मेडिकल कॉलेज ले जाते समय उनकी मौत हो गई। घर पर सूचना पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया।

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Mar 21, 2026
मृतक की फाइल फोटो ट्रेन और स्टेशन फोटो जेनरेट AI

औरैया जिले के फफूंद रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसे में दरोगा की जान चली गई। चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश के दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया। वह प्लेटफॉर्म पर गिर पड़े। गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जिससे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ पड़ी है।

औरैया के फफूंद रेलवे स्टेशन पर शनिवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां तैनात दरोगा सूरज बली चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे। तभी उनका संतुलन बिगड़ गया और वह प्लेटफॉर्म पर गिर पड़े। गिरने से उनके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत एंबुलेंस की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया। लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

ट्रेन धीमी होने पर दरोगा ने चढ़ने का किया प्रयास स्टेशन पर गिरे

जानकारी के मुताबिक, सूरज बली की तैनाती औरैया जिला कोर्ट में थी। वह ईद की ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने घर बांदा जाने के लिए निकले थे। फफूंद स्टेशन से बांदा के लिए सीधी ट्रेन नहीं होने के कारण वह पहले कानपुर जाने की योजना बना रहे थे। इसी दौरान उन्होंने नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस में चढ़ने की कोशिश की, जो वहां नहीं रुकती है। बताया जा रहा है कि रेलवे क्रॉसिंग के पास कॉशन लगने के कारण ट्रेन की रफ्तार कुछ धीमी हुई थी। इसी का फायदा उठाकर दरोगा ट्रेन में चढ़ने लगे। लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया। वह मुंह के बल प्लेटफॉर्म पर गिर पड़े। पास में मौजूद एक सफाईकर्मी ने उन्हें बचाने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से घायल हो चुके थे।

मेडिकल कॉलेज ले जाते समय हुई मौत विभाग में दौड़ी शोक की लहर

घटना के बाद उन्हें तुरंत दिबियापुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां प्राथमिक इलाज के बाद हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सूरज बली मूल रूप से बांदा जिले के रहने वाले थे। वह 1990 बैच में सिपाही भर्ती हुए थे। प्रमोशन पाकर दरोगा बने थे। उनकी सेवानिवृत्ति में अभी करीब पांच साल का समय बाकी था। वह दिबियापुर में सरकारी आवास में अकेले रहते थे। जबकि उनका परिवार बांदा में ही रहता है। परिवार में पत्नी, तीन बेटे और तीन विवाहित बेटियां हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। वहीं, परिवार को भी हादसे की जानकारी दे दी गई है। इस घटना से पुलिस विभाग में शोक की लहर है।

Published on:
21 Mar 2026 09:32 pm
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