
नई दिल्ली: अगर आपके पास कोई वाहन है तो आपके पास उसका मोटर इंश्योरेंस ( Motor insurance ) भी होगा। दरअसल अगर आपका वाहन चोरी हो जाता है या फिर आप किसी एक्सीडेंट का शिकार हो जाते हैं तो आपके वाहन की मरम्मत का खर्च इंश्योरेंस कंपनी उठाती है। लेकिन आजकल देश में देश में फर्जी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है जिसमें ग्राहक से इंश्योरेंस की रकम तो पूरी वसूली जाती है लेकिन जब क्लेम लेने की बारी आती हैं तब ये फर्जी इंश्योरेंस कंपनियां मुकर जाती हैं। तो चलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप कैसे इन फर्जी इंश्योरेंस कंपनियों की जालसाजी से बच सकते हैं।
( Insurance Regulatory Development Authority of India ) भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण, इरडा ( IRDA ) के डाटा के मुताबिक़ पिछले दो सालों में 53.7 करोड़ रुपये की फर्जी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी बिकी हैं, वहीं ऐसे मामलों की संख्या 498 से बढ़ कर 1,192 तक पहुंच गई है। इरडा की फ्रॉड मॉनिटरिंग सेल के डाटा की बात करें तो 2016-17 में 498 नकली पॉलिसी बिकीं, वहीं 2017-18 में ये संख्या लगभग दोगुनी यानी 823 हो गई। जबकि साल 2018-19 में यह संख्या बढ़ कर 1192 हो चुकी है।
आधे से भी कम कीमत में मिल जाती हैं ये पॉलिसी
आपको ये बात जानकार बेहद हैरानी होगी कि सबसे ज्यादा फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने वालों में ट्रक चालाक और दुपहिया वाहन चालक आते हैं। दरअसल ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ये फर्जी पॉलिसी आधे से भी कम कीमत में बन जाती हैं लेकिन दुर्घटना होने या फिर वाहन चोरी हो जाने की स्थिति में इन पॉलिसीज में आपको कोई क्लेम नहीं मिलता है। लोग बस पुलिस चेकिंग से बचने के लिए ये पॉलिसी खरीदते हैं।
ऐसे जान सकते हैं पॉलिसी की पूरी डीटेल्स
आपको बता दें कि कुछ कंपनियों ने फर्जीवाड़े से लोगों को बचाने के लिए अपनी पॉलिसीज पर बारकोड लगाए हुए हैं जिन्हें स्कैन करके ग्राहक एक बार में ही पॉलिसी से सम्बंधित सारी डीटेल्स हासिल कर सकते हैं।
इन स्टेप्स को फॉलो करके बच सकते हैं फर्जी इंशोरेंस पॉलिसीज से