
अयोध्या. सैकड़ों साल बीत गए। भगवान श्री राम हजारों मील दूर कभी पैदल चलकर तो कभी रथ पर सवार होकर माता सीता को ब्याहने मिथिला नरेश के यहां जनकपुर गए थे। तब से सदियां बीत गयीं। जनकपुर और अयोध्या के लिए न तो सीधा संपर्क मार्ग हो पाया न ही परिवहन की कोई व्यवस्था हो पायी। नेपाल और भारत दो राष्ट्र। दोनों मित्र राष्ट्र हैं फिर भी दोनों राष्ट्रों ने इस तरफ कोई पहल नहीं की। लेकिन शनिवार को लंबे समय के बाद जनकपुर और अयोध्या के लिए बस सुविधा शुरू हो रही है। अभी तक जनकपुर से काठमांडू या तो हवाई यात्रा के जरिए पहुंचा जा सकता है फिर बस से। काठमांडू से गोरखपुर होते हुए अयोध्या पहुंचा जा सकता था। लेकिन भारत और नेपाल के बीच इस बस यात्रा के शुरू हो जाने के बाद जनकपुर और अयोध्या का दूरी बहुत सुगम हो जाएगी।
रामायण सर्किट से होकर गुजरेगी जनकपुर-अयोध्या बस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल यात्रा के दौरान सीता के मायके और नेपाल के ऐतिहासिक शहर जनकपुर से बस हो हरी झंडी दिखाई। राजधानी काठमांडू से जनकपुर 225 किलोमीटर दूर है। पीएम मोदी ने यहां अयोध्या आने वाली बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस बस का नाम जनकपुर-अयोध्या है। यह बस नेपाल के जनकपुर से सीतामढ़ी होते हुए गोरखपुर और फिर अयोध्या पहुंचेगी। इस बस में 35 सीटें हैं। हरी झंडी दिखाने के बाद इस बस में नेपाल के 10 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा। बस रात को 11 बजे गोरखपुर में विश्राम करेगी और अगले दिन सुबह यानी शनिवार को 9 बजे अयोध्या पहुंचेगी।
कहां-कहां से गुजरेगा रामायण सर्किट
इस बस सेवा को शुरू करने का उद्देश्य सीता के मायके से उनके ससुराल (राम के घर) को जोडऩा है। जनकपुरधाम और अयोध्या रूट रामायण सर्किट का हिस्सा है। इस सर्किट को केंद्र सरकार ने अयोध्या, ऋंगवेरपुर और चित्रकूट को मिलाकर रामायण सर्किट के रूप में विकसित करने के लिए 223.94 करोड़ का बजट पास किया था। इस बस के अयोध्या पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका स्वागत करेंगे। इस दौरान अयोध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। 12 मई को ही बस वापस जनकपुर के लिए चली जाएगी।
मायके और ससुराल का रिश्ता है अयोध्या-जनकपुर
जनकपुर वह शहर है जहां राम-सीता का विवाह हुआ था। बाद में यहां पर जानकी मंदिर बना दिया गया। समय के साथ जनकपुर में काफी बदलाव आ गया है। अयोध्या और जनकपुर के बीच मायके और ससुराल का रिश्ता है। यह जगह पर्यटन के लिहाज से बहुत समृद्ध है। जनकपुरी और आसपास के पर्यटक स्थल बेहतरीन डेस्टिनेशन्स में से एक माने जाते हैं। यहां पर आसपास कई टूरिस्ट स्पॉट्स हैं।
अयोध्या से जनकपुर जाती है बारात
अयोध्या के राजा राम और जनकपुर की राजकुमारी सीता के विवाह के बाद अयोध्या और जनकपुर के बीच जो प्रणय संबंध बने उसका इतिहास श्री राम चरित मानस से लेकर हिन्दू धर्म के विभिन्न ग्रंथों में मिलता है। हालांकि वक्त बीतने के साथ ही इन संबंधों पर धूल की परतें भी जमा हो गई थीं, लेकिन हिंदूवादी संगठन विश्व हिंदू परिषद अभी दोनों स्थानों को जोडऩे की कड़ी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। परिषद प्रतिवर्ष अयोध्या से जनकपुर तक भगवान राम की बारात लेकर जाता है। जिसमें अयोध्या के साधु संत शामिल होते हैं। नेपाल शहर के जनकपुर में स्थित मां जानकी मंदिर में भगवान श्री राम और राजकुमारी सीता का भव्य विवाह आयोजन होता है।