
Digvijaya Singh Sanatan Swabhiman Yatra: कांग्रेस सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को लेकर अयोध्या में सियासी और धार्मिक बयानबाजी तेज हो गई है। हनुमानगढ़ी और तपस्वी छावनी से जुड़े संतों ने यात्रा के ऐलान पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक कदम बताया है। संतों का आरोप है कि कांग्रेस और दिग्विजय सिंह अब सनातन धर्म का मुद्दा उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। संतों ने यात्रा के उद्देश्य और इसके पीछे की राजनीतिक मंशा पर भी सवाल खड़े किए हैं।
हनुमानगढ़ी मंदिरके महंत राजू दास ने दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित यात्रा पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी और उससे जुड़ी विचारधारा लंबे समय से सनातन संस्कृति, हिंदू धर्म और हिंदुत्व के विरोध में रही है। महंत राजू दास के मुताबिक, ऐसे में अब ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने का ऐलान राजनीतिक बदलाव की बजाय जनता को भ्रमित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राम मंदिर से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में राम मंदिर से जुड़े वित्तीय मामले को विपक्षी गठबंधन की ओर से जिस तरह उठाया गया, उस पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
उन्होंने दावा किया कि मामले में दोषी बताए गए लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और मंदिर का पैसा वापस लाकर जमा कराया गया है। परमहंस आचार्य ने कहा कि इसके बावजूद इस मुद्दे को सनातन धर्म से जोड़कर उठाना उचित नहीं है और इससे धार्मिक आस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य महाराज ने भी दिग्विजय सिंह की यात्रा को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का अपना स्वाभिमान ही नहीं बचा है, उनके द्वारा ‘स्वाभिमान यात्रा’ निकालना समाज के साथ धोखे जैसा है। उन्होंने यात्रा के नाम और इसके राजनीतिक उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि सनातन धर्म के नाम पर राजनीति किए जाने को संत समाज स्वीकार नहीं करेगा।
स्वामी नरेंद्रचार्य जी महाराज ने भी ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को सीधे तौर पर राजनीतिक मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यदि यात्रा राम जन्मभूमि के उद्घाटन या किसी धार्मिक आयोजन से जुड़ी होती, तो अयोध्या के लोग उसका स्वागत करते। हालांकि, उनके मुताबिक मंदिर से जुड़े कथित दान और वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे को राजनीतिक रूप देने के उद्देश्य से यात्रा निकालना संत समाज को स्वीकार नहीं है।
स्वामी नरेंद्रचार्य ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह की यात्रा का मकसद 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करना है। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह अपने राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर इस मुद्दे को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को लेकर भी टिप्पणी की और दावा किया कि राज्य में पार्टी की सफलता की संभावनाएं सीमित हैं।
गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने धर्म के नाम पर कथित लूट और श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़* के खिलाफ ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। बताया जा रहा है कि यात्रा 20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी। इस यात्रा के जरिए दिग्विजय सिंह धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों को उठाने की बात कह चुके हैं। यात्रा के ऐलान के बाद अयोध्या के संतों की ओर से सामने आए विरोध और बयानों ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।