Laddu Gopal lunar eclipse rules : होली पर पड़ रहे चंद्रग्रहण को लेकर लड्डू गोपाल की सेवा करने वाले भक्तों के लिए खास नियम बताए गए हैं। जानें सूतक काल में क्या करें, ग्रहण के बाद पूजा विधि, शुद्धिकरण प्रक्रिया और होली कब खेलना होगा शुभ।
अयोध्या : होली के पावन पर्व पर इस बार पड़ रहे चंद्रग्रहण को लेकर लड्डू गोपाल की सेवा करने वाले भक्तों के लिए विशेष सावधानियां बताई गई हैं। वर्तमान समय में लगभग हर घर में लड्डू गोपाल की स्थापना की जा रही है और श्रद्धालु विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं। ऐसे में ग्रहण और सूतक काल के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। इस विषय पर अयोध्या के पंडित विजयानंद तिवारी ने बताया कि ग्रहण के बाद कैसे अपने लड्डू महाराज की सेवा करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण से पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। इस दौरान घर के मंदिर में नियमित पूजा स्थगित रखें। लड्डू गोपाल को किसी भी तरह का भोग न लगाएं। लड्डू गोपाल को विश्राम अवस्था में रखें। कोई भी शुभ कार्य आरंभ न करें। जैसे बड़े मंदिरों में सूतक के दौरान कपाट बंद कर दिए जाते हैं, उसी प्रकार घर में भी पूजा-अर्चना रोक दी जाती है।
पंडित विजयानंद तिवारी के अनुसार, चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद सबसे पहले घर के मंदिर की शुद्धि करें। इसके बाद गंगाजल से पूरे मंदिर में छिड़काव करें। लड्डू गोपाल को गंगाजल और दूध से स्नान कराएं। स्वच्छ या नए वस्त्र धारण कराएं। विधि-विधान से पूजा करें। नियमित रूप से भोग लगाएं। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के बाद शुद्धिकरण और पुनः पूजा करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
बड़े मंदिरों में सूतक काल के दौरान कपाट बंद रहते हैं। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर की धुलाई होती है। गर्भगृह की विशेष सफाई की जाती है। भगवान का भव्य श्रृंगार किया जाता है। फिर से विधि-विधान के साथ आरती और पूजा प्रारंभ होती है। लड्डू गोपाल की सेवा करने वाले भक्तों को भी इसी मर्यादा का पालन करना चाहिए।
पुजारियों ने स्पष्ट किया है कि ग्रहण और सूतक काल के दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है। इसलिए जो लोग होली मनाने की तैयारी कर रहे हैं, वे चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद ही रंगों का उत्सव मनाएं। ग्रहण समाप्ति और शुद्धिकरण के पश्चात ही रंग लगाना शुभ माना जाता है।