अयोध्या

Ram Mandir Donation Scam : राम मंदिर चढ़ावा कांड: ट्रस्ट और SBI ने बनाए थे सख्त नियम, जांच में खुल रही लापरवाही की परतें

Ram Mandir Donation Scam Investigation : राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT जांच में बड़ा खुलासा! ट्रस्ट और SBI के बीच हुए MOU के नियमों के उल्लंघन के मिले संकेत। सुप्रीम कोर्ट का तत्काल सुनवाई से इनकार। पूरी खबर पढ़ें।
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Ram Mandir Donation Scam
Ram Mandir Donation Scam : राम मंदिर मामले में बैंक और ट्रस्ट दोनों की थी बराबरी की जिम्मेदारी, PC- Wikipedia

अयोध्या : राम मंदिर के दान-पात्रों से प्राप्त चढ़ावे में कथित हेरफेर के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नई परतें खुलती जा रही हैं। जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि चढ़ावे की गणना और जमा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच तय कई महत्वपूर्ण नियमों का नियमित रूप से पालन नहीं किया गया।

सूत्रों के अनुसार फरवरी 2025 में ट्रस्ट और एसबीआई के बीच एक विस्तृत समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ था, जिसमें दान-पात्र खोलने से लेकर रकम की गणना, निगरानी और बैंक खाते में जमा कराने तक की पूरी प्रक्रिया तय की गई थी। उद्देश्य यह था कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे की गणना में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे। हालांकि अब एसआईटी जांच में इन्हीं प्रावधानों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।

संयुक्त निगरानी थी अनिवार्य, लेकिन पालन पर उठे सवाल

एमओयू के तहत दान-पात्र खोलने और गिनती कक्ष के संचालन के दौरान ट्रस्ट और एसबीआई के नामित अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति अनिवार्य थी। गणना में लगे कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड निर्धारित किया गया था और पूरी प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित किया जाना था।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि बैंक अधिकारियों के मासिक रोटेशन का नियम कितना लागू हुआ। सूत्रों का दावा है कि कुछ कर्मचारी और अधिकारी लंबे समय तक एक ही व्यवस्था में कार्यरत रहे, जिससे निगरानी तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं।

तलाशी, रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था भी जांच के घेरे में

एमओयू में यह भी प्रावधान था कि गिनती कक्ष में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों की नियमित या रैंडम तलाशी ली जाएगी। प्रत्येक दान-पात्र से प्राप्त राशि का अलग-अलग रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और क्रमवार गणना सुनिश्चित की जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन व्यवस्थाओं का कितना पालन हुआ। दैनिक रिपोर्ट, नकद जमा पर्चियां, चालान और रजिस्टरों के सत्यापन से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं।

नियमित समीक्षा होती तो पहले मिल सकते थे संकेत

समझौते में यह भी स्पष्ट किया गया था कि अनावश्यक नकदी लंबे समय तक जमा न रहे, इसके लिए नियमित समीक्षा की जाएगी। जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि इस व्यवस्था की प्रभावी मॉनिटरिंग होती तो संभावित अनियमितताओं के संकेत पहले ही मिल सकते थे।

पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी ट्रस्ट के पास थी। ऐसे में अब निगरानी तंत्र के संचालन और उसकी प्रभावशीलता की भी गहन समीक्षा की जा रही है।

मामला सामने आने के बाद बदली पूरी व्यवस्था

चढ़ावे में कथित हेरफेर का मामला उजागर होने और आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद दान गणना की पूरी व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं। जानकारी के अनुसार वर्तमान में चढ़ावे की गणना के लिए 39 कर्मचारियों को तैनात किया गया है। इससे पहले यह संख्या 45 थी, जबकि शुरुआती दौर में केवल 22 कर्मचारी इस काम में लगे थे।

अब कर्मचारियों की नियमित जांच की जा रही है, ड्रेस कोड को सख्ती से लागू किया गया है और कंट्रोल रूम से निगरानी के लिए चार अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा पूरी गणना प्रक्रिया की प्रतिदिन वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

इस बीच, चढ़ावे में कथित हेरफेर की सीबीआई जांच और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से ऑडिट कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है।

वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दाखिल जनहित याचिकाओं पर सोमवार को समयाभाव के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब मामले में 1 जुलाई को सुनवाई होने की संभावना है। याचिकाकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से कराने तथा चढ़ावे का विशेष ऑडिट कराने की मांग की है।

एमओयू में किसकी क्या थी जिम्मेदारी?(बैंक की जिम्मेदारी)

  • दान-पात्र से प्राप्त राशि को निर्धारित अंतराल पर ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा कराना।
  • गणना प्रक्रिया को तय दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित कराना।
  • नोट गिनने वाली मशीनों का संचालन और रखरखाव सुनिश्चित करना।
  • अनावश्यक नकदी जमा न रहे, इसकी नियमित समीक्षा करना।
  • गणना में लगे कर्मचारियों की नियुक्ति और निगरानी करना।
  • बैंक अधिकारियों का मासिक रोटेशन लागू करना।

ट्रस्ट की जिम्मेदारियां

  • पूरी गणना प्रक्रिया की निगरानी कर पारदर्शिता बनाए रखना।
  • जमा पर्चियों, चालानों और अन्य अभिलेखों का सत्यापन करना।
  • कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना।

ट्रस्ट और बैंक के अधिकारियों के बीच एमओयू साइन हुआ कि दान पात्र को ट्रस्ट और एसबीआई के नामित अधिकारियों की मौजूदगी में ही खोला जाएगा। गिनती कक्ष का संचालन संयुक्त रूप से सुनिश्चित करना होगा।

Updated on:
30 Jun 2026 02:26 pm
Published on:
30 Jun 2026 02:08 pm
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