Ram Temple Digital Records: राम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े दशकों पुराने ऐतिहासिक दस्तावेज अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। करीब 75 प्रतिशत डिजिटाइजेशन कार्य पूरा हो चुका है। इससे शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़े प्रमाणिक अभिलेखों तक सरल पहुंच मिलेगी।
Ayodhya Ram Temple Movement Archives Go Digital: राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े दशकों पुराने ऐतिहासिक दस्तावेज अब डिजिटल दुनिया का हिस्सा बन रहे हैं। लंबे समय तक बक्सों में सुरक्षित रखे गए ये महत्वपूर्ण अभिलेख अब चरणबद्ध तरीके से डिजिटाइज किए जा रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जिससे शोधार्थियों, विद्यार्थियों, इतिहासकारों और आम नागरिकों को एक क्लिक पर प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। यह पहल केवल दस्तावेजों को स्कैन करने भर तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के सबसे लंबे और संवेदनशील कानूनी-धार्मिक आंदोलनों में से एक के ऐतिहासिक साक्ष्यों को भविष्य के लिए संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े दस्तावेज कई दशकों से विभिन्न अदालतों, आयोगों और संगठनों के पास सुरक्षित थे। इनमें शामिल हैं। अदालतों में प्रस्तुत साक्ष्य,पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट,ऐतिहासिक अभिलेख,नक्शे और स्थल विवरण,गवाहों के बयान,आयोगों की रिपोर्ट,सरकारी दस्तावेज। ये सभी रिकॉर्ड उस ऐतिहासिक कानूनी प्रक्रिया की नींव रहे, जिसके परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर निर्माण के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
अधिकारियों के अनुसार अब तक डिजिटाइजेशन का कार्य तेजी से आगे बढ़ा है। 17 बक्सों में सुरक्षित दस्तावेज पूरी तरह डिजिटल किए जा चुके हैं। हाईकोर्ट और निचली अदालतों से जुड़े 153 बक्सों में से,130 बक्सों की फाइलें डिजिटाइज कर अपलोड की जा चुकी हैं। शेष दस्तावेजों पर भी तेजी से कार्य जारी है। यह डिजिटल अभिलेखागार चरणबद्ध तरीके से सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
राम जन्मभूमि आंदोलन केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं था, बल्कि यह भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और न्यायिक यात्रा का भी महत्वपूर्ण अध्याय है। इस डिजिटाइजेशन से-
1 इतिहास सुरक्षित रहेगा
कागजी दस्तावेज समय के साथ नष्ट हो सकते हैं, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड लंबे समय तक संरक्षित रहेंगे।
2 शोध में सुविधा
इतिहासकारों, विधि विशेषज्ञों और शोधार्थियों को प्रमाणिक स्रोत आसानी से मिलेंगे।
3 पारदर्शिता बढ़ेगी
न्यायिक प्रक्रिया और ऐतिहासिक तथ्यों को आम लोगों तक पहुंचाना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
4 नई पीढ़ी को जानकारी
आने वाली पीढ़ियां इस आंदोलन की पृष्ठभूमि, कानूनी लड़ाई और ऐतिहासिक संदर्भों को समझ सकेंगी।
डिजिटाइज किए जा रहे अभिलेखों में वे दस्तावेज भी शामिल हैं, जो सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किए गए थे। इनमें विशेष रूप से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट,स्थल से जुड़े ऐतिहासिक प्रमाण,विभिन्न पक्षों के दावे और प्रतिदावे,न्यायालयी बहसों का रिकॉर्ड,इन साक्ष्यों ने न्यायालय को ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण निष्कर्षों तक पहुंचने में मदद की।
डिजिटाइजेशन के दौरान दस्तावेजों को उच्च गुणवत्ता वाले स्कैनर से स्कैन किया जा रहा है। प्रत्येक फाइल को क्रमवार नंबर दिया जा रहा है। श्रेणीबद्ध किया जा रहा है,डिजिटल डेटाबेस में सुरक्षित किया जा रहा है,बैकअप सर्वर पर संरक्षित रखा जा रहा है। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की क्षति या डेटा हानि की संभावना कम हो जाती है।
अधिकारियों का कहना है कि यह डिजिटल संग्रह एक समर्पित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। यहां उपयोगकर्ता दस्तावेज खोज सकेंगे,विषयवार रिकॉर्ड देख सकेंगे,ऐतिहासिक रिपोर्ट डाउनलोड कर सकेंगे,हालांकि कुछ संवेदनशील अभिलेखों की पहुंच नियमन के तहत रखी जा सकती है।
राम मंदिर निर्माण के साथ-साथ अब आंदोलन से जुड़े दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन अयोध्या को एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शोध केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।