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राम मंदिर की साजिश रचने वाले ‘आतंकी’ अब्दुल की जेल में हत्या, मां बोली– ‘एक बार चेहरा दिखा दो’

Ram Mandir Bomb Plot Accused Killed : अयोध्या में राम मंदिर को बम से उड़ाने की साजिश रचने के आरोपी अब्दुल रहमान की हरियाणा की फरीदाबाद जेल में हत्या कर दी गई।

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आतंकी अब्दुल की जेल में कर दी गई थी हत्या, घर पर बिलखते परिजन, PC- X

अयोध्या : अयोध्या में राम मंदिर को बम से उड़ाने की साजिश रचने के आरोपी अब्दुल रहमान की हरियाणा की फरीदाबाद जेल में हत्या कर दी गई। 20 वर्षीय अब्दुल पर जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद रहते हुए उसके ही साथी कैदी अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट ने नुकीली चीज से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई।

अब्दुल रहमान को गुजरात एटीएस ने मार्च 2025 में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों का दावा था कि वह अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) के कुख्यात आतंकी अबू सूफियान के संपर्क में था और राम मंदिर पर हमले की साजिश में शामिल था।

सुबह गांव में पहुंची मौत की खबर

9 फरवरी की सुबह करीब 9:30 बजे फरीदाबाद जेल प्रशासन की ओर से मिल्कीपुर (अयोध्या) गांव के प्रधान के बेटे कैलाश जायसवाल को फोन कर अब्दुल की मौत की सूचना दी गई। बताया गया कि अब्दुल की तबीयत गंभीर हो गई थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिवार को फरीदाबाद बुलाया गया।

सूचना मिलते ही अब्दुल के पिता अबू बकर और चाचा उस्मान फरीदाबाद के लिए रवाना हो गए। परिवार के अनुसार, शव को अयोध्या लाकर यहीं कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

मां को नहीं बताई गई हत्या की सच्चाई

अब्दुल की हत्या की जानकारी फिलहाल घर की महिलाओं को नहीं दी गई है। परिवार ने उन्हें बताया कि अब्दुल की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और अस्पताल में इलाज चल रहा है। बताया गया कि अब्दुल के दिल में बचपन से ही सुराख था और उसका इलाज पहले भी कई अस्पतालों में कराया जा चुका था। जेल में भी वह दवाएं ले रहा था।

गैंगस्टर ने अरुण चौधरी का किया समर्थन

इसी बीच गैंगस्टर रोहित गोदारा गैंग ने अरुण चौधरी का समर्थन किया है। गैंग के सदस्य महेंद्र डेला ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि देश के खिलाफ काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पोस्ट में अब्दुल रहमान को देशविरोधी गतिविधियों में शामिल बताया गया और अरुण चौधरी के कृत्य का समर्थन किया गया।

घर में मातम, बिलखती रहीं महिलाएं

अयोध्या-रायबरेली हाईवे से करीब 5 किलोमीटर अंदर चमनगंज रोड स्थित अब्दुल के घर पहुंची, तो वहां मातम का माहौल था। 650 स्क्वायर फीट के छोटे से मकान के बाहर महिलाएं बिलख रही थीं। दादी, मां और मौसी सहित कई महिलाएं जमीन पर बैठकर रोती दिखीं। मोहल्ले के लोग भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। परिजनों ने मीडिया को महिलाओं से बातचीत नहीं करने दी।

'एक बार मेरे बेटे का चेहरा दिखा दो' रोते हुए अब्दुल की मां आश्मीन बार-बार यही कहती रहीं- 'अभी तो जेल में उससे मिलकर आए थे… पता नहीं उसके साथ क्या हो गया। एक बार मेरे बेटे का चेहरा दिखा दो। उसे जेल से बाहर निकालो, ताकि उसका इलाज हो सके।'

कुछ दिन पहले ही जेल में हुई थी मुलाकात

अब्दुल के मामा इसरार ने बताया कि जुमे की रात अब्दुल के माता-पिता उससे जेल में मिलने गए थे। शीशे के आर-पार फोन पर बातचीत करवाई गई थी। मां खाने का सामान भी लेकर गई थीं, लेकिन जेल नियमों के चलते कैदी को कुछ देने की अनुमति नहीं मिली।

उन्होंने बताया कि परिवार जमानत के लिए वकील के संपर्क में था और फरीदाबाद कोर्ट में अर्जी भी दाखिल की गई थी, लेकिन उससे पहले ही यह घटना हो गई।

गरीबी में जी रहा था परिवार

परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। सरकार की ओर से उन्हें अंत्योदय कार्ड मिला हुआ है। घर के बाहर एक छोटी चिकन शॉप है, जिसे पिता अबू बकर चलाते थे, लेकिन अब्दुल की गिरफ्तारी के बाद दुकान ज्यादातर बंद ही रही। अब्दुल पहले ई-रिक्शा चलाकर परिवार की मदद करता था। घर में मां आश्मीन और तीन छोटी बहनें हैं, जो अब्दुल से छोटी हैं।

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