
शिवालय पर ध्वजारोहण, विशेष अनुष्ठान, विवाहोत्सव और शिव बारात आकर्षण का केंद्र (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Ayodhya Ram Temple Grand Mahashivratri First Time Celebration: धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से ऐतिहासिक नगरी अयोध्या इस वर्ष एक और अद्वितीय अध्याय जोड़ने जा रही है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में पहली बार महाशिवरात्रि का पर्व भव्यता और दिव्यता के साथ मनाया जाएगा। इसे लेकर मंदिर प्रशासन, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और संबंधित संगठनों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का विषय भी रहेगा।
महाशिवरात्रि उत्सव की औपचारिक शुरुआत 15 फरवरी को प्रस्तावित ध्वजारोहण कार्यक्रम से होगी। यह ध्वजारोहण परकोटे के छह मंदिरों में दक्षिण-पश्चिम दिशा में निर्मित शिवालय के शिखर पर किया जाएगा। हालांकि अभी तक मुख्य अतिथि का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि कोई वरिष्ठ संत या धर्माचार्य इस पावन कार्य को संपन्न करेंगे। ध्वजारोहण के साथ ही पूरे परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला प्रारंभ हो जाएगी।
सूत्रों के अनुसार कुबेर नवरत्न टीला स्थित कुबेरेश्वर महादेव और परकोटे के शिवालय में विशेष अभिषेक-पूजन की विस्तृत व्यवस्था की गई है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का रुद्राभिषेक, दुग्धाभिषेक और पंचामृत स्नान कराया जाएगा। इसके उपरांत भगवान का भव्य श्रृंगार किया जाएगा, जिसमें चंदन, भस्म, बिल्वपत्र, पुष्पमालाएं और रत्नाभूषणों का प्रयोग होगा। सायंकाल महाआरती के साथ विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।
रथ सप्तमी की तर्ज पर महाशिवरात्रि के दिन कुबेर टीला और परकोटे का शिवालय पूरे दिन श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि मंदिर परिसर में तैनात कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी और ट्रस्ट से जुड़े कार्यकर्ता भी दर्शन-पूजन कर सकें। साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी विशेष सुविधा प्रदान की जाएगी।
इस पावन अवसर पर अंगद टीला पर पार्थिव द्वादश ज्योतिर्लिंगों का निर्माण किया जाएगा। श्रद्धालु मिट्टी से बने इन ज्योतिर्लिंगों का पूजन कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही सामूहिक रुद्र पाठ और महामृत्युंजय जाप का भी आयोजन प्रस्तावित है।
सायंकाल महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम भक्तों के लिए अत्यंत भावनात्मक और आकर्षक होगा। विवाहोत्सव के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों और भजनों की ध्वनि से पूरा परिसर गूंज उठेगा।
उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण शिव बारात होगी, जो मंदिर परिसर के भीतर ही निकाली जाएगी। भगवान शिव के गणों, साधु-संतों और भक्तों की सहभागिता से यह शोभायात्रा आध्यात्मिक उल्लास का अनूठा दृश्य प्रस्तुत करेगी।
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज के नेतृत्व में कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिर परिसर की सजावट, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, चिकित्सा और मार्गदर्शन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रस्तावित कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में निर्माण कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं, ताकि सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी हो सकें।
राम मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि का यह प्रथम आयोजन राम और शिव के सनातन संबंध का प्रतीक माना जा रहा है। यह संदेश देता है कि धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक एकता ही भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। अयोध्या में होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव लेकर आएगा।
Published on:
11 Feb 2026 07:29 am
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