अयोध्या पहुंचे बाबा रामदेव ने एक बड़े धार्मिक विवाद पर खुलकर बात की। उन्होंने ऐसा क्या कहा जो साधु-संतों के बीच चर्चा का विषय बन गया? राम जन्मभूमि और सनातन को लेकर उनके बयान ने सबका ध्यान खींच लिया।
योग गुरु स्वामी रामदेव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तीर्थ स्थलों पर साधु-संतों को आपसी विवाद से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना होगा।
योग गुरु स्वामी रामदेव शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने एक आश्रम में आयोजित योग शिविर में हिस्सा लिया और साधकों को योग व जीवन मूल्यों का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने राम जन्मभूमि, सनातन धर्म और समाज से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। रामदेव ने बताया कि प्रयागराज में स्नान के बाद वह अयोध्या आए हैं और रामलला के दर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा कि अयोध्या हमारा पवित्र तीर्थ है। जिसे इतिहास में विदेशी आक्रांताओं के अत्याचारों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद यह नगर आज भी आस्था और संस्कारों का बड़ा केंद्र बना हुआ है। रामदेव ने कहा कि जब रामत्व, कृष्णत्व, हनुमत्व और शिवत्व जैसे आदर्श आम लोगों के जीवन में उतरेंगे। तभी सनातन धर्म का गौरव समाज में स्थापित होगा।
योग गुरु ने यह भी कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। बल्कि इसे हमारे आचरण और व्यवहार में दिखना चाहिए। राम और उनकी मर्यादाएं हमारे जीवन का हिस्सा बनें। यही उनका संकल्प है। इसी भावना के साथ वह अयोध्या आए हैं।
प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि तीर्थ स्थलों पर किसी भी शंकराचार्य या साधु को विवाद नहीं करना चाहिए। आपसी मतभेद और टकराव से सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि हमें आपस में लड़ने के बजाय एक-दूसरे के साथ खड़े होकर सनातन की रक्षा करनी चाहिए। एकता से ही धर्म और समाज दोनों मजबूत होंगे।