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अयोध्या के प्रतिष्ठित दशरथ महल (बड़ा स्थान) के महंत बिंदुगद्याचार्य और महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज आखिरकार एक सप्ताह के लंबे इंतजार के बाद सकुशल अपने धाम लौट आए हैं। खाड़ी देशों में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के हालातों के कारण वे अबूधाबी में फंस गए थे। बुधवार सुबह जैसे ही वे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे पूरा परिसर 'जय सियाराम' के उद्घोष से गूंज उठा। संतों की आंखों में अपने साथी को सुरक्षित देख संतोष दिखाई पड़ा।
महाराज के स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर वीवीआईपी हलचल रही। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह खुद संतों की अगवानी करने पहुंचे। उनके साथ रसिक पीठ के आचार्य महंत जनमेजय शरण और महंत हेमंत दास सहित अयोध्या के प्रमुख संतों ने फूलमालाओं और पुष्प वर्षा के साथ महाराज का अभिनंदन किया। बृजभूषण शरण सिंह ने इस मौके पर कहा कि संतों की सुरक्षित वापसी पूरे धर्मनगरी के लिए हर्ष का विषय है।
महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य बीते 27 फरवरी को अबूधाबी में नवनिर्मित भव्य स्वामीनारायण मंदिर के दर्शन के लिए गए थे। उन्हें 2 मार्च को भारत वापस लौटना था लेकिन इसी बीच ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। सुरक्षा कारणों से खाड़ी क्षेत्र में हवाई उड़ानों पर अस्थायी रोक लगा दी गई। इसके चलते महाराज को वहीं रुकना पड़ा। विदेश में फंसे होने की खबर मिलते ही अयोध्या में उनके अनुयायियों की धड़कनें तेज हो गई थीं।
महाराज की सुरक्षा को लेकर अयोध्या के संत समाज में भारी चिंता थी। उनकी सकुशल वापसी के लिए सरयू तट से लेकर मठ-मंदिरों तक विशेष हवन, पूजन और शांति यज्ञ किए गए थे। संतों और भक्तों ने विश्व शांति के साथ-साथ महाराज की जल्द वापसी की कामना की थी। जैसे ही 4 मार्च को हवाई सेवाएं बहाल हुईं महाराज तुरंत भारत के लिए रवाना हुए।
एयरपोर्ट से बाहर निकलते हुए महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य ने सबका आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि वहां स्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं लेकिन प्रभु की कृपा और भक्तों की प्रार्थनाओं के बल पर वे सुरक्षित लौट आए हैं। अब अयोध्या के संत समाज में उत्सव का माहौल है और बड़ा स्थान में विशेष आरती की तैयारी की जा रही है।
Published on:
05 Mar 2026 04:41 pm
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