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इजराइल के पीएम नेतन्याहू की विजय के लिए अयोध्या में पूजा-पाठ

Benjamin Netanyahu Ayodhya prayer : बेंजामिन नेतान्याहू के लिए अयोध्या के मंदिर में हवन पूजन रखा गया। उनकी सलामती की दुआ की गई।

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नेतान्याहू के लिए अयोध्या में हुई पूजा, PC- PAtrika

रामनगरी अयोध्या में इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की ‘विजय’ और सफलता की कामना को लेकर विशेष पूजा-पाठ और हवन किए जाने का मामला चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, एक मठ में जगतगुरू परमहंस आचार्य ने बेंजामिन नेतान्याहू के फोटो पर तिलक लगाया और उनके विजय की कामना की। बताया जा रहा है कि अनुष्ठान के दौरान इजराइल की शांति, सुरक्षा और वहां के नेतृत्व की मजबूती के लिए प्रार्थना की गई। हवन-पूजन के दौरान पुजारियों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया और विश्व में शांति स्थापित होने की कामना की।

हालांकि, इस आयोजन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ यूजर्स इसे भारत-इजराइल मित्रता का प्रतीक और सांस्कृतिक समर्थन बता रहे हैं, तो कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि किसी दूसरे देश के राजनीतिक नेतृत्व के लिए इस तरह के धार्मिक अनुष्ठान का क्या औचित्य है।

स्थानीय प्रशासन की ओर से इस आयोजन पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। शहर में कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने की जानकारी दी गई है।

अयोध्या, जो देश और दुनिया में अपनी धार्मिक पहचान के लिए जानी जाती है, वहां इस तरह के आयोजन ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर बहस का विषय बना हुआ है।

अभी संघर्ष रुकने के हालात नहीं

ईरान और अमेरिका युद्ध के कमजोर होने के आसार नहीं हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 4 से 5 हफ्ते तक संघर्ष चलने की बात कह रहे हैं। साथ ही अमेरिका का कहना है कि अब तक सबसे बड़ा हमला नहीं किया गया है। इधर, ईरान भी झुकने के मूड में नहीं है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका से किसी तरह की बातचीत नहीं की जाएगी।

इजराइल-अमेरिका और ईरान में चल रहा युद्ध

इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। हालिया हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। मध्य-पूर्व में बढ़ती सैन्य गतिविधियों का असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है, ताकि व्यापक युद्ध और मानवीय संकट को टाला जा सके।