5 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मिसाइलें गरज रहीं थी…थोड़ी ही दूर पर अमेरिकन बेस पर गिर रहीं थी; अयोध्या लौटे पीठाधीश्वर ने बताया खौफनाक मंजर

Middle East War News : अयोध्या के चक्रवर्ती राजा दशरथ महल के पीठाधीश्वर अबू धाबी से भारत सुरक्षित लौट आए हैं। उन्होंने वहां का खौफनाक मंजर बताया।

2 min read
Google source verification

पीठाधीश्वर स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य ने बताया खौफनाक मंजर, PC- X

अयोध्या के चक्रवर्ती राजा दशरथ महल के पीठाधीश्वर बिन्दु गद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य आखिरकार सुरक्षित अयोध्या लौट आए हैं। लेकिन उनकी यह वापसी किसी सामान्य यात्रा की तरह नहीं थी, बल्कि युद्ध जैसे हालातों के बीच गुजरे खौफनाक पलों की कहानी बन गई। अबू धाबी में फंसे रहने के दौरान उन्होंने जिस भयावह माहौल को करीब से देखा, उसे सुनकर हर कोई सिहर उठता है।

स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य 27 फरवरी को धार्मिक यात्रा पर अयोध्या से अबू धाबी गए थे। उनका उद्देश्य वहां स्थित स्वामीनारायण मंदिर में दर्शन-पूजन करना था, जिसका शिलान्यास भारत के प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था। लेकिन उनकी यात्रा के अगले ही दिन मध्य-पूर्व के हालात अचानक बदल गए। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया।

28 फऱवरी की रात से गूंज रहीं थी मिसाइलें

28 फरवरी से ही इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया। जिस स्थान पर स्वामी जी ठहरे हुए थे, वहां से महज करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर अमेरिका का एक एयरबेस था। अचानक रात के सन्नाटे को चीरती हुई मिसाइलों की आवाजें गूंजने लगीं। ईरान की ओर से किए जा रहे हमलों के धमाके इतने तेज थे कि आसपास के इलाकों में उनकी गूंज साफ सुनाई देती थी।

स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य बताते हैं कि जब भी कोई मिसाइल गिरती, तो ऐसा लगता मानो दिवाली के पटाखों की तेज आवाज आसमान को चीर रही हो। हर धमाके के साथ लोगों के दिलों की धड़कनें तेज हो जाती थीं। होटल और इमारतों में ठहरे लोग सहमे हुए थे। कई बार घंटों तक लोग कमरों में ही बंद रहे, क्योंकि किसी को नहीं पता था कि अगला हमला कब और कहां होगा।

कई फ्लाइट्स की गईं रद्द

इन हालातों के चलते अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ा। कई फ्लाइट्स अचानक रद्द कर दी गईं, जिससे स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य और उनके साथ गए अन्य लोग अबू धाबी में ही फंस गए। हालात इतने तनावपूर्ण थे कि यह भी आशंका जताई जा रही थी कि ईरान एयरपोर्ट को भी निशाना बना सकता है।

इस बीच भारत सरकार और गृह मंत्रालय से संपर्क किया गया। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे थे। स्वामी जी बताते हैं कि हर धमाके के साथ भय का माहौल बन जाता था, लेकिन उस समय सभी लोग प्रभु श्रीराम का स्मरण करते थे।

उन्होंने कहा, 'जब भी जोरदार धमाका होता, हम सब ‘सीताराम’ का जाप करने लगते थे। हमें विश्वास था कि प्रभु राम की कृपा हम पर बनी रहेगी और हम सुरक्षित लौटेंगे।'

आखिरकार कई दिनों की चिंता और अनिश्चितता के बाद हालात कुछ सामान्य हुए और स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य की वापसी संभव हो सकी। अयोध्या पहुंचने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली और इसे प्रभु राम की कृपा बताया।