अयोध्या

विहिप के पदाधिकारी अयोध्या में होंगे एक साथ, राम मंदिर आन्दोलन के लिए होगी चर्चा

विश्व हिन्दू परिषद के नवनियुक्त पदाधिकारी व सदस्य कई वर्षों के बाद फिर एक साथ अयोध्या में होंगे।
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Apr 22, 2018
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अयोध्या. विश्व हिन्दू परिषद के नवनियुक्त पदाधिकारी व सदस्य कई वर्षों के बाद फिर एक साथ अयोध्या में होंगे।राम मंदिर आन्दोलन को लेकर विहिप संघ , विद्यार्थी परिषद भाजपा तथा कई अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों के साथ मुलाक़ात करेंगे। जिसके लिए अयोध्या में विहिप नवनियुक्ति अध्यक्ष पूर्व राज्यपाल विष्णु सदाशिव कोकजे के स्वागत के लिए तैयारी शुरू हो गई है। अयोध्या के कारसेवक पुरम में इस कार्यक्रम को लेकर विहिप के कई पदाधिकारी अयोध्या पहुंच चुके हैं। विहिप संरक्षक स्वर्गीय अशोक सिंहल के निधन के बाद यह पहला मौका होगा जब विहिप की पूरी कमेटी एक साथ अयोध्या में होगी । यह सभी लोग राम जन्मभूमि सहित अयोध्या के प्रमुख मंदिरों का दर्शन संतो से भी मुलाकात कर और राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए तरासे जा रहे पत्थरों को देखने कार्यशाला जायेगे। इस कार्यक्रम के लिए नव नियुक्ति उपाध्यक्ष चम्पतराय, केन्द्रीय मंत्री राजेन्द्र सिंह पंकज, पुरुषोत्तम नारायण सिंह तथा प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा के साथ अन्य कार्यकर्ता आज कारसेवक पुरम में डेरा डाल दिये है तथा 23 अप्रैल को विहिप के नवनियुक्त अध्यक्ष पूर्व राज्यपाल विष्णु सदाशिव कोकजे के साथ कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार संगठन महामंत्री विनायक राव देश पांडेय, प्रबंधन समिति सदस्य दिनेशचन्द्र , क्षेत्रीय संगठन मंत्री अम्बरीष सिंह सभी एक साथ अयोध्या पहुचेंगे।


इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह ने कहा कि विहिप के अध्यक्ष होने के नाते रामलला का दर्शन करने आ रहे है और राम जन्मभूमि का आन्दोलन को वहीं स्थान से आगे बढ़ाएंगे तथा कांग्रेस पर हमला बोलते हुए बताया कि चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने को कांग्रेस का षड्यंत्र बताया कहा देश के सर्वोच्च न्यायालय पर अनुचित दबाव बनाकर राम मंदिर निर्माण के निर्णय को डलवाने का कांग्रेस षड्यंत्र कर रही है। पूर्व में भी जब इंदिरा गांधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से निर्णय हुआ उस निर्णय को बदलवाने कि उन्होंने पूरी कोशिश की और जब निर्णय नहीं बदला सका तो उन्होंने आपातकाल लगा दिया। 19 महीने तक अपने निजी स्वार्थ के लिए देश को पंगु बनाकर के अपने हितों के लिए उपयोग किया और उसके पहले 1973 में भी उन्होंने तीन वरिष्ठ जजों को दरकिनार करके अपने पसंद के कनिष्टम न्यायाधीश ए एन रे को मुख्य न्यायाधीश नामित कर दिया था। इस निर्णय से नाराज होकर उन तीनों जजों ने इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस का यही चरित्र रहा है जिसपर आज भी कार्य कर रही है।

Published on:
22 Apr 2018 07:56 am
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