आजमगढ़

UP assembly elections 2022: अखिलेश के दाव ने बीजेपी की बढ़ाई मुश्किल, एकमात्र जीती सीट पर भी बिगड़ा समीकरण

UP assembly elections 2022 समाजवादी पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले आजमगढ़ में सपा मुखिया के एक दाव ने बीजेपी की मुश्किल बढ़ा दी है। पिछले चुनाव में बीजेपी को यहां एक मात्र सीट फूलपुर पवई मिली थी लेकिन इस बार यहां जिताऊ उम्मीदवार की तलाश बीजेपी के लिए आसान नहीं होगी। कारण कि फूलपुर से लडने के बाद रमाकांत यादव अब तक कोई चुनाव नहीं हारे हैं।
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Updated: 4 Feb 2022, 5:08 PM IST
प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. UP assembly elections 2022 यूपी विधानसभा चुनाव में दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के एक दाव ने बीजेपी की मुश्किल बढ़ा दी है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जो एक मात्र सीट जीती थी उसपर भी संकट खड़ा हो गया है। कारण कि अरूणकांत के बाद अब बीजेपी के पास फूलपुर पवई में कोई ऐसा मजबूत चेहरा नहीं है जिस पर पार्टी दाव खेल सके। कारण कि सपा ने बाहुबली रमाकांत यादव को मैदान में उतारा है। रमाकांत यादव खुद फूलपुर से अब तक कोई चुनाव नहीं हारे हैं।

बता दें कि वर्ष 2017 के चुनाव में रमाकांत यादव बीजेपी में थे और बीजेपी ने उनके पुत्र अरूणकांत यादव को फूलपुर पवई सीट से मैदान में उतारा था। अरूणकांत ने जिले में 22 साल का सूखा खत्म करते हुए सीट जीती थी। अरूणकांत यादव जिले में बीजेपी के एक मात्र विधायक है। अब रमाकांत यादव सपा के टिकट पर इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में बीजेपी ने अरूणकांत को विधानसभा चुनाव न लड़ाने का फैसला किया है। अब यहां बीजेपी को नए उम्मीदवार की तलाश है। वहीं सपा यहां मजबूत दावेदारी कर रही है। कारण कि रमाकांत यादव फूलपुर से स्वयं लड़कर अब तक कोई चुनाव नहीं हारे हैं।

रमाकांत यादव के राजनीतिक कैरियर की बात करें तो वर्ष 1985 का चुनाव रमाकांत यादव कांग्रेस जे के टिकट पर लड़े और विधायक चुने गए थे। उसके बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा। हालांकि उन्होंने जीत की राह तय करने के लिए पार्टी बदलने में भी कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई और अतीत की पार्टियों को विस्मृत कर नित नई पार्टियों को गले लगाते गए। रमाकांत यादव ने 1989 में बसपा, 1991 में सजपा के टिकट पर और 1993 में सपा के टिकट पर यहां से जीत हासिल की। उन्होंने फूलपुर की राजनीतिक विरासत अपनी पत्नी रंजना यादव को सौंप दी और खुद सदर सीट पर संसदीय राजनीति शुरू की और यहां भी सफल रहे। लेकिन फूलपुर मेें उनका यह प्रयोग विफल साबित हुआ। रंजना चुनाव हार गयी। इसके बाद वर्ष 2007 में अपने पुत्र अरूणकांत यादव को सपा के टिकट पर मैदान में उतारा और जीतने में सफल रहे। वर्ष 2017 में अब उनके पुत्र अरूणकांत यहां बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए।

रमाकांत के प्रभाव का असर इतना था कि कभी पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव को यहां हार का सामना करना पड़ा था। अब बीजेपी को रमाकांत के खिलाफ ऐसे प्रत्याशी की तलाश जो मजबूती से मुकाबला कर सके जो बीजेपी के लिए आसान नहीं है। बीजेपी के किसी नेता ने चुनाव की तैयारी भी नहीं की है। कारण कि सभी मान कर चल रहे थे अरूणकांत को टिकट मिलना तय है।

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