बसपा नेता बाहुबली भूपेंद्र सिंह मुन्‍ना और भाजपा के पूर्व सांसद रमाकांत यादव एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाते है।
रणविजय सिंह की रिपोर्ट
आजमगढ़. खुद की सत्ता के लिए दलबदल और समझौते आम बात हैं लेकिन किसी तीसरे को सत्ता दिलाने के लिए दो धुर विरोधी एक साथ होंगे ऐसा पहली बार होता दिख रहा है, वह भी मुलायम के गढ़ कहे जाने वाले आजमगढ़ में। इस बात की चर्चा इसलिए जोरों पर है क्योंकि मंगलवार को जब सपा के पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव के भतीजे प्रमोद यादव अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस देने डीएम आवास पहुंचे तो बाहुबली भुपेंद्र सिह मुन्ना अगर उनके साथ थे तो भाजपा के पूर्व सांसद रमाकात यादव के कई करीबी भी वहां नजर आये।
यह माना जा रहा है कि अविश्वास प्रसताव पर पूर्व सांसद ने सहमति दे दी है, अगर ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर सपा के लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। वैसे इस गठजोड़ के पीछे सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ ही नहीं बलिक बदले की भावना भी छिपी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों नेता मंच भी शेयर करते है।
बता दें कि बसपा नेता बाहुबली भूपेंद्र सिंह मुन्ना और भाजपा के पूर्व सांसद रमाकांत यादव एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाते है। अभी मार्टीनगंज में हुए क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष उप चुनाव में इसकी बानगी देखने को मिली थी। जब मुन्ना सिंह ने बीजेपी नेता के भाई का समर्थन किया तो रमाकांत यदव पार्टी लाइन से हटकर खुद को सपा नेता बताने वाले ठाकुर मनोज सिंह के साथ खड़े हो गये। यह तो महज बानगी है ऐसे कई और मौके आये है जब दोनों ने एक दूसरे का खुलकर विरोध किया है। जिले में ही नहीं बल्कि पूर्वांचल में इस बात की चर्चा होती है कि मुन्ना और रमाकांत के बीच छत्तीस का आंकड़ा है।
दुर्गा के भतीजे प्रमोद के साथ रमाकांत यादव के जाने की वजह भी है। वर्ष 2012 में सपा के सत्ता में आने के बाद सड़क निर्माण में देरी और बजट निर्धारण के मुद्दे पर सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव लगातार रमाकांत यादव पर हमलावर रहे। हवलदार की बहू मीरा यादव जिला पंचायत अध्यक्ष है और रमाकांत मीरा को हटाने में सफल होंगे तो यह सपा के साथ ही हवलदार के लिए बड़ा झटका होगा। कारण कि उनकी अध्यक्ष की कुर्सी पर भी कई पार्टी नेताओं की नजर है। रमाकांत के लिए बदला लेने का इससे अच्छा अवसर नहीं हो सकता।
रहा सवाल भूपेंद्र सिंह मुन्ना का तो विधान सभा चुनाव 2017 के दौरान प्रमोद ने खुलकर मुन्ना सिंह का साथ दिया था। जबकि मुन्ना के खिलाफ उनके चाचा दुर्गा प्रसाद यादव सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। आने वाले दिनों में भी मुन्ना को राजनीति करनी है और विधानसभा या लोकसभा लड़ना है तो किसी बडे यादव नेता का साथ चाहिए। प्रमोद यादव का जिले में जनाधार है, अगर वे जिला पंचायत अध्यक्ष बनते है तो मुन्ना के लिए सदर में राह आसान होगी।
यही वजह है कि वे खुलकर प्रमोद के साथ है। वे प्रमोद के साथ डीएम से मिलने भी पहुंचे थे। रमाकांत यादव इस दौरान न तो कहीं नजर आये और ना ही इस संबंध में अभी तक उनका कोई बयान आया है लेकिन उनके समर्थक जिला पंचायत सदस्य प्रमोद के साथ खड़े दिखे। यही वजह है कि राजनीतिक हल्के में यह जोरदार चर्चा है कि रमाकांत का साथ मिलने के बाद ही प्रमोद अविश्वास प्रस्ताव लाये हैं। राजनीति का यह मिलाप कितना सफल होगा यह तो समय बतायेगा लेकिन यह सच है कि जिले में एक नई राजनीतिक हलचल शुरू हो गयी है।