संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन से जारी पूर्वानुमान के अनुसार राजस्थान प्रान्त में टिड्डी दलों के आक्रमण की सम्भावना को देखते हुए पूर्वांचल में भी कृषि विभाग एलर्ट हो गया है। कारण कि पिछले वर्ष टिड्डों ने पूर्वांचल में भारी तबाही मचाई थी। इस बार टिड्डे अगर आये भी तो नुकसान न कर सके इसके लिए किसानों को सतर्क रहने को कहा गया है। साथ ही विभाग अपने स्तर पर भी इन्हें खत्म करने की तैयारी में जुटा है।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. कोरोना महामारी से जूझ रहे यूपी के किसानों के लिए बुरी खबर है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन से जारी पूर्वानुमान के अनुसार टिड्डो का दल राजस्थान में हमला कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो गत वर्ष की तरह पूर्वांचल में भी टिड्डों के हमले का पूरा खतरा होगा। पिछले वर्ष टिड्डों नेे फसलों को भारी नुकसान किया था। इसलिए इस बार प्रशासन अभी से सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों की सतर्कता फसलों के नुकसान को रोक सकती है। वहीं विभाग भी इनके संभावित हमलों को रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम करने में जुटा है।
बता दें कि टिड्डे हमेशा से किसानों के दुश्मन रहे हैं। प्रतिवर्ष गन्ना व धान की फसलों को टिड्डे भारी नुकसान पहुंचाते है लेकिन इनकी संख्या सीमित होनें के कारण किसान दवा आदि के माध्यम से इनसे निपट लेते है लेकिन इस बार कोरोना महामारी के बीच टिड्डों के बड़े दल के हमले की संभावना व्यक्त की जा रही है। पिछले वर्ष जून व जुलाई के महीने में टिड्डों का प्रकोप पूर्वांचल में देखने को मिला था। इस बार कृषि विभाग हमले को लेकर पहले से एलर्ट है। इनका मानना है कि किसान व विभाग मिलकर टिड्डों के हमले से होने वाली क्षति को रोक सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डा. आरपी सिंह का कहना है कि 25 से 30 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा की दिशा में उड़ने वाला टिड्डा रात में हमला करता है। एक टिड्डा दल आठ से दस घंटे में करीब सौ किमी का सफर करता है। एक बार भोजन के बाद जब सौ किमी उड़ता है और फिर भूख लगते ही वहां के क्षेत्र में पड़ने वाली फसल को चट कर जाता है। टिड्डा दल रात में पेड़ और फसलों पर ही बैठता है और फिर सूर्य की पहली किरण निकलते ही फिर उड़ान भरता है। वह पूर्वांचल में भारी तबाही मचा सकता है। टिड्डों का हमला होने पर कुछ उपाय कर किसान अपनी फसल को बचा सकते हैं।
टिड्डे आते हैं तो क्या करें किसान-
-अपने खेतों में आग जलाकर पटाखे फोड़कर, थाली बजाकर, ढोल नगाड़े बजाकर आवाज करें जिससे टिड्डों का दल आपके खेत में न बैठने पाए।
-कीटनाशक रसायनों जैसे क्लोरपीरिफॉस, लिंडा इत्यादि कीटनाशकों का टिड्डी दल के ऊपर छिड़काव करें।
-यह टिड्डा दल शाम को 6 से 7 बजे के आसपास जमीन पर बैठ जाता है और फिर सुबह 8 बजे के करीब उड़ान भरता है अतः इसी अवधि में इनके ऊपर कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करके इनको मारा जा सकता है।
-क्षेत्र में टिड्डों को देखते ही प्रशासन अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों को सूचित करें।