आजमगढ़

आजमगढ़ से अखिलेश यादव परिवार के इस सदस्य को दे सकते हैं लोकसभा टिकट!, खबर लगते ही मची खलबली

अपने गढ़ को बचाने के लिये अखिलेश यादव का होगा यह सबसे बड़ा दांव।

3 min read
अखिलेश यादव शिवपाल यादव और योगी आदित्यनाथ

आजमगढ़. वर्ष 2014 के लोक सभा चुनाव में पूर्वांचल में बड़ी मात खाने वाली सपा ने मुलायम सिंह यादव को आजमगढ़ से मैदान में उतार किसी तरह इज्जत बचाई थी। मुलायम सिंह ने अब यहां से चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। ऐसे में 2019 इस सीट को बचाकर रखना सपा के लिए बड़ी चुनौती है। पार्टी की गुटबंदी और दावेदारों की लंबी फेहरिश्त देखने के बाद यह माना जा रहा है सपा मुखिया यहां से फिर परिवार के किसी सदस्य पर ही दाव खेलेंगे। सांसद बनने के बाद तेज प्रताप की आजमगढ़ में पहली यात्रा वे भी चुनाव से ठीक पहले नई चर्चा को जन्म दे दिया है। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें यहां से प्रत्याशी बना सकती है।

कारण कि मुलायम सिंह यादव फिर मैनपुरी से चुनाव लड़ सकते है। वर्ष 2014 के चुनाव में मुलायम सिंह आजमगढ़ और मैनपुरी से सांसद चुने गए थे। उन्होंने बाद में मैनपुरी से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद तेज प्रताप यहां से चुनाव लड़कर सांसद बने थे। अब मुलायम के चुनाव न लड़ने की स्थित में उन्हें आजमगढ़ से लड़ाने की चर्चा शुरू हो गयी है। खुद तेज प्रताप ने भी कहा है कि पार्टी का जहां से निर्देश होगा वे वहीं से चुनाव लड़ेगे। तेज प्रताप के दौरे के बाद टिकट के दावेदारों के माथे पर सिकन साफ दिख रही है।

सांसद तेज प्रताप यादव (फाइल फोटो) IMAGE CREDIT:

बता दें कि आजमगढ़ को सपा बसपा का गढ़ कहा जाता है। पिछले चुनाव में जब पूरे देश में पीएम मोदी की लहर थी उस समय भी आजमगढ़ सीट पर सपा कब्जा करने में सफल रही थी। जबकि बसपा का पूर्वांचल में खाता तक नहीं खुला था। वर्ष 2019 के चुनाव में सपा बसपा गठबंधन के जरिये बीजेपी को मात देने का प्रयास कर रही है। गठबंधन की अटकलों के बीच बसपा ने जिले की लालगंज सीट पर प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर गठबंधन होता है तो आजमगढ़ सीट सपा के खाते में जाएगी।

आजमगढ़ सीट से समाजवादी पार्टी से पूर्व मंत्री बलराम यदव, पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हवलदार यादव टिकट की दावेदारी कर रहे है। मजेदार बात है कि ये तीनों नेताओं का अपना-अपना अलग गुट है। दुर्गा और बलराम पहले भी लोकसभा चुनाव लड़ चुके है। दोनों नेता पर एक दूसरे को हराने का भी आरोप लग चुका है। ऐसे में सपा मुखिया के लिए टिकट का फैसला आसान नहीं होने वाला है।

पिछले चुनाव में भी सपा से यही दावेदार थे। सपा ने पहले बलराम यादव को टिकट दिया। बाद में हवलदार यादव को प्रत्याशी बनाया गया लेकिन गुटबंदी को देखते हुए खुद मुलायम सिंह को यहां से मैदान में उतरना पड़ा। गुटबंदी का ही परिणाम था कि मुलायम सिंह के पूरे कुनबे को प्रचार के लिए मैदान में उतरना पड़ा। इसके बाद भी मुलायम िंसह मात्र 63 हजार से जीते।

राजनीति के जानकारों का मनना है कि सपा मुखिया इस गुटबंदी से निपटने के लिए एक बार फिर अपने परिवार के किसी सदस्य को मैदान में उतार सकते हैं। तेज प्रताप का दौरा इसी परिपेक्ष में देखा जा रहा है। कारण कि उनका चुनाव लड़ना तय है और मुलायम के लिए मैनपुरी से सुरक्षित दूसरी सीट नहीं हो सकती।

By Ran Vijay Singh

ये भी पढ़ें

उत्तर प्रदेश की पहली और अनूठी काऊ मिल्क प्रोडक्शन यूनिट का दिवाली पर होगा शुभारंभ
Published on:
20 Sept 2018 02:38 pm
Also Read
View All