आजमगढ़

विधानसभा चुनाव से पहले यूपी NDA में फूट! ओपी राजभर के बयान से भड़के संजय निषाद, निर्दलीय लड़ने का ऐलान

यूपी में चुनाव से पहले एनडीए में दरार दिखने लगी है। ओमप्रकाश राजभर ने आजमगढ़ की सभी सीटों पर दावा किया, जिससे संजय निषाद नाराज हो गए।
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Updated: 10 Apr 2026, 8:48 AM IST
अतरौलिया सीट पर राजभर vs निषाद आमने-सामने
अतरौलिया सीट पर राजभर vs निषाद आमने-सामने Source- Patrika

UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए गठबंधन में तनाव दिखने लगा है। सुभासपा यानी 'सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी' के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने गुरुवार को आजमगढ़ पहुंचकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आजमगढ़ की सभी 10 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। तैयारी पूरी चल रही है। राजभर ने साफ कहा कि आजमगढ़ किसी एक का गढ़ नहीं है। यहां सभी जाति और धर्म के लोग रहते हैं। उन्होंने अपनी पारंपरिक सीट गाजीपुर की जहूराबाद छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट पर भी दावा ठोक दिया। 2022 के चुनाव में अतरौलिया सीट से निषाद पार्टी ने उम्मीदवार उतारा था। राजभर के इस बयान से सहयोगी दल निषाद पार्टी में नाराजगी फैल गई।

संजय निषाद का पलटवार और निर्दलीय लड़ने का ऐलान

निषाद पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने ओमप्रकाश राजभर के बयान पर तेज प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अतरौलिया निषाद बिरादरी बाहुल्य सीट है। यहां निषाद पार्टी की पहली दावेदारी है। पिछले विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी का उम्मीदवार कुछ वोटों से हारकर रनरअप रहा था। संजय निषाद ने साफ ऐलान किया कि इस बार अतरौलिया से निषाद प्रत्याशी ही चुनाव लड़ेगा। अगर गठबंधन में सीट नहीं मिली, तो उनका उम्मीदवार निर्दलीय या निषाद पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ेगा। उन्होंने राजभर पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने का आरोप लगाया। संजय निषाद बोले- अभी सीटों का बंटवारा भी नहीं हुआ है। किसी सीट पर बातचीत तक नहीं हुई। फिर भी राजभर अतरौलिया पर दावा कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है।

ओपी राजभर क्यों बने विवाद के कारण?

ओमप्रकाश राजभर ने अचानक अपनी पुरानी सीट छोड़कर अतरौलिया पर नजर जमाई। यह सीट निषाद समुदाय के प्रभाव वाली मानी जाती है। 2022 में यहां निषाद पार्टी ने लड़ाई लड़ी थी। राजभर के बेटे अरविंद राजभर को अन्य सीटों पर उतारने की भी चर्चा है। राजभर का कहना है कि आजमगढ़ में उनकी पार्टी सभी 10 सीटों पर तैयारी कर रही है। लेकिन निषाद पार्टी इसे अपना क्षेत्र मानती है। दोनों नेता योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री हैं, लेकिन अब आपस में भिड़ गए हैं। यह टकराव एनडीए के अंदरूनी कलह को दिखाता है।

बीजेपी के लिए कितना नुकसान?

विधानसभा चुनाव से पहले सहयोगी दलों में यह झगड़ा बीजेपी के लिए चिंता का विषय बन गया है। एनडीए में सुभासपा और निषाद पार्टी दोनों छोटे, लेकिन अहम सहयोगी हैं। दोनों पार्टियां पिछड़े और अति पिछड़े वोट बैंक को प्रभावित करती हैं। अगर दोनों दल आमने-सामने चुनाव लड़ेंगे, तो वोट बंट सकते हैं। इससे बीजेपी की सीटें कम हो सकती हैं। विशेषकर पूर्वांचल में निषाद और राजभर समुदाय के वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। संजय निषाद ने पहले ही कहा है कि निषाद समाज पूरे यूपी में 80 सीटों पर असर डालता है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर सीट बंटवारे में जल्द समझौता नहीं हुआ, तो गठबंधन कमजोर पड़ सकता है। विपक्षी दल जैसे समाजवादी पार्टी इस दरार का फायदा उठा सकते हैं। बीजेपी को दोनों नेताओं को मनाना पड़ेगा ताकि एकजुटता बनी रहे।

अभी तक सीटों का बंटवारा शुरू नहीं हुआ है। लेकिन यह शुरुआती टकराव चेतावनी दे रहा है। अगर दोनों नेता अपनी जिद नहीं छोड़ते तो 2027 में एनडीए को नुकसान हो सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी बड़े भाई की भूमिका निभाकर जल्द हल निकालेगी। ओपी राजभर और संजय निषाद दोनों ही अपने समुदाय के लिए ज्यादा सीटें चाहते हैं। लेकिन गठबंधन की एकता बनाए रखना बीजेपी की बड़ी चुनौती है।

Updated on:
10 Apr 2026, 8:48 AM IST
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