आजमगढ़

world hepatitis day : सावधान! हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी से करना है बचाव तो तत्काल छोड़िए शराब

world hepatitis day 2021: 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। क्या आपको पता है कि यह बीमारी क्यों होती है और यह कितने प्रकार की होती है, यह इंसान की जान भी ले सकती है। अगर असमय मौत से बचना है तो कुछ खास चीजों का ध्यान रखना जरूरी है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस-
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Updated: 28 Jul 2021, 6:47 AM IST
प्रतीकात्मक फोटो
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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. हेपेआइटिस एक खतरनाक बीमारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार हेपेटाइटिस से संबंधित बीमारियों से प्रति सेकेंड एक व्यक्ति की मौत होती है। हेपेटाइटिस कई प्रकार की होती है। दूषित भोजन से दूरी और शराब का सेवन बद कर हम हेपेटाइटिस से बच सकते है। वर्तमान में कोरोना संक्रमण के दौरान वायरल हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ा है। ऐसे में सावधान रहने की जरूरत है। लोगों को हेपेटाइटिस के प्रति जागरुक करने के लिए ही प्रतिवर्ष 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है।

मऊ जिला अस्पताल में तैनात डा. विनय कुमार सिंह यादव ने बताया कि हेपेटाइटिस तब होती है जब लीवर में किसी तरह की चोट हो अथवा यह संक्रमित हो। यह आपके लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है। हेपेटाइटिस कई प्रकार का होता है। वायरल हेपेटाइटिस सबसे आम प्रकार के हेपेटाइटिस है। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, और ई। अल्कोहलिक हेपेटाइटिस शराब के सेवन के कारण होता है। विषाक्त हेपेटाइटिस कुछ विषों, रसायनों या दवाओं के कारण हो सकता है। ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस एक दीर्घकालिक प्रकार है जिसमें आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली आपके लीवर पर हमला करती है।

उन्होनें बताया कि हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित भोजन या पानी के संपर्क में आने से होता है। हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और हेपेटाइटिस डी किसी ऐसे व्यक्ति के रक्त के संपर्क में आने से फैलता है जिसे यह बीमारी हो। हेपेटाइटिस बी और डी शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क में आने से भी फैल सकता है। यह कई तरह से हो सकता है, जैसे नशीली दवाओं की सुई आपस में साझा करने, असुरक्षित यौन संबंध बनाने से। हम जागरुक रहकर और सावधानी बरतकर इससे बच सकते हैं।

डा. विनय के मुताबिक आम तौर पर इसके लक्षण कम दिखाई देते है। संक्रमित व्यक्ति को एहसास ही नहीं होता कि वह संक्रमण का शिकार है। बुखार, थकान, भूख में कमी, मिचली, उल्टी करना, पेट में दर्द, पीला मूत्र, मिट्टी के रंग का मल, जोड़ों का दर्द, पीलिया आदि इसके प्रमुख लक्षण है। लक्षण दिखते ही हमें चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। यदि किसी को तेज संक्रमण है तो लक्षण संक्रमित होने के 2 सप्ताह से 6 महीने के बीच आने शुरू हो जाते है। क्रोनिक हेपेटाइटिस से सिरोसिस, लीवर फेेल होने अथवा लीवर कैंसर जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। क्रोनिक हेपेटाइटिस का शीघ्र उपचार जरूरी होता है।

खून की जांच, लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड आदि से इसका पता लगाया जा सकता है। लीवर की क्षति की जांच के लिए लीवर बायोप्सी भी की जाती है। रहा सवाल उपचार का तो यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको किस प्रकार का हेपेटाइटिस है। यह क्रोनिक है या नहीं। तीव्र वायरल हेपेटाइटिस अक्सर अपने आप दूर हो जाता है। बेहतर महसूस करने के लिए, आपको बस आराम करने और पर्याप्त तरल पदार्थ लेने की आवश्यकता होती है। लेकिन कुछ मामलों में यह अधिक गंभीर हो सकता है।

क्रोनिक हेपेटाइटिस के इलाज के लिए अलग-अलग दवाएं हैं। जिन लोगों को अल्कोहलिक हेपेटाइटिस है, उन्हें शराब पीना बंद कर देना चाहिए। यदि आपके क्रोनिक हेपेटाइटिस से लीवर फेल हो जाता है या लीवर कैंसर हो जाता है, तो आपको लीवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता हो सकती है। हेपेटाइटिस का बड़ा कारण शराब का सेवन है। इसलिए इससेे जितना दूर रहे खतरा उतना ही कम होगा। इसके अलावा टीका लगवाकर हम हेपेटाइटिस ए और बी से बच सकते है। इसलिए जरूरी है कि एहतियात बरते और सुरक्षित रहें।

BY Ran vijay singh

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