बड़वानी

एमपी में भीषण सड़क हादसा, एक साथ उठीं 6 अर्थियां, शादी वाले गांव में पसरा मातम

Badwani Road Accident: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले रूही गांव में था शादी का माहौल, इस बीच आई 6 मौतों की खबर के बाद पसरी रूदाली, मातम में डूब गया पूरा गांव...
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Updated: 22 Apr 2026, 9:59 AM IST
Badwani Road Accident Horrific 6 dead
Badwani Road Accident Horrific 6 dead

Badwani Road Accident: बडराजमार्ग पर मौत ने बारात का रास्ता छीन लिया। खरगोन रोड पर टोल प्लाजा के पास बोलेरो और टैंकर की आमने-सामने टक्कर में छह युवकों की जान चली गई। बोलेरो एमपी 46 टी 0894 में सात युवक सवार थे। ये सभी राजपुर के पास अतरसंभा गांव से रूई गांव आई बारात में शामिल होने आए थे। इनमें दूल्हे का भाई यशवंत भी था। बताया गया कि युवक रूई से जुलवानिया डीजल भरवाने आए थे। डीजल भरवाकर रूई लौट रहे थे। तभी जुलवानिया और रूई के बीच टोल प्लाजा के पास खरगोन से आ रहे टैंकर एमपी 09 बीजी 5750 से बोलेरो भिड़ गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बोलेरो के परखच्चे उड़ गए।

5 की मौके पर ही मौत, शव कार में ही फंसे

सचिन पिता गोकुल वास्कले (25) निवासी पटेलपुरा साकड़, प्रद्युगन पिता गुलीचंद सहिते (25) निवासी सालखेड़ा और पह्रश्वपू पिता हीरालाल भिलाला (32) निवासी लिंबाई की मौके पर ही मौत हो गई। दो युवकों के शव बोलेरो में बुरी तरह फंस गए। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर शवों को निकाला।

गंभीर घायल आकाश पिता दयाराम (25) निवासी रालामंडल सिवाई व सोहन पिता झबरसिंह बघेल (28) निवासी सालखेड़ा ने जुलवानिया अस्पताल में दम तोड़ दिया। सुरेश पिता मांगीलाल (28) निवासी देवझिरी, और यशवंत पिता सुपडिय़ा (30) निवासी अतरसंभा को बड़वानी रेफर किया गया। परिजन यशवंत को निजी वाहन से बड़वानी ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। यशवंत को मिलाकर हादसे में छह लोगों की मौत हो गई।

गांव में पसरा मातम

हादसे की खबर मिलते ही रूई में बारात का माहौल गमगीन हो गया। जुलवानिया अस्पताल में शवों के बीच परिजनों की चीखें गूंज उठीं। शादी की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं। शादी को जल्द निपटाकर लोग अर्थी की तैयारियों में जुट गए । पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। टैंकर जइत कर चालक की तलाश जारी है।

बंद पड़ी एंबुलेंस

बड़े हादसों के लिए जुलवानिया पॉइंट पर 108 एंबुलेंस तैनात की गई थी। मकसद था कि गंभीर घायलों को गोल्डन ऑवर में इलाज मिले और समय रहते बड़वानी रेफर किया जा सके। पर मंगलवार को जब छह जिंदगियां सांसों से लड़ रही थीं, तब एंबुलेंस सुधार के लिए बंद खड़ी थी। जिम्मेदारों की लापरवाही ने सिस्टम की पोल खोल दी।

पत्रिका की पहल पर हाईवे के हादसों को देखते हुए ये एंबुलेंस दी गई थी, लेकिन आज जब जरूरत पड़ी तो, एंबुलेंस को ही इलाज की जरूरत थी। देर से अंजड़ पॉइंट से आई 108 एंबुलेंस दो घायलों को लेकर राजपुर में खराब होकर खड़ी हो गई। इससे पहले यशवंत को परिजन निजी वाहन से बड़वानी ले गए, जिसने रास्ते में दम तोड़ दिया। सवाल उठता है। यदि एंबुलेंस चालू होती तो क्या एक जान नहीं बच जाती?

Updated on:
22 Apr 2026, 9:59 AM IST
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