बड़वानी

बड़वानी में 100 साल से जल रही है अखंड ज्योत, ‘600 किमी.’ दूर से पैदल लाए थे ज्योत

Shardiya Navratri 2026: बड़वानी स्थित योगमाया माता मंदिर 100 वर्षों से अधिक समय से जल रही अखंड ज्योत के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर आस्था, धार्मिक परंपरा और समाज की सहभागिता का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
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Oct 15, 2026
योगमाया माता मंदिर (Photo Source - Patrika)
योगमाया माता मंदिर (Photo Source - Patrika)

Shardiya Navratri 2026: मध्यप्रदेश के बड़वानी शहर स्थित योगमाया माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। इस मंदिर की सबसे विशेष पहचान यहां पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से निरंतर प्रज्वलित अखंड ज्योत है। भक्त इसे माता जगदंबा की कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक मानते हैं। मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना है। इसका निर्माण वर्ष 1916 में शुरू हुआ था जो 1925 में पूर्ण हुआ। स्थापना में सिरवी समाज और राजस्थान के बिलाड़ा से आए दीवान साहब का अहम योगदान रहा।

मंदिर के पुजारी पं. नवीन दास शर्मा ने बताया कि योगमाया माता मंदिर लंबे समय से धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-अर्चना का केंद्र है। यहां प्रतिदिन धार्मिक गतिविधियां होती हैं और श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। प्रज्वलित अखंड ज्योत भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक बनी हुई है। राजस्थान के बिलाड़ा से आए दीवान साहब के प्रयासों से माता की स्थापना हुई थी। सिर्वी समाज के श्रद्धालु राजस्थान से पैदल यात्रा कर ज्योत लेकर बड़वानी पहुंचे थे। इसके बाद यहां माता की गादी स्थापित कर ज्योत की पूजा शुरू हुई। धीरे-धीरे यह आस्था का केंद्र बन गया। शुरुआत में गादी और ज्योत की ही पूजा होती थी। करीब 45 वर्ष बाद वर्ष 1970 के आसपास मंदिर में माता की मूर्ति भी स्थापित की गई और पूजा परंपरा आगे बढ़ी।

34 हजार में बना था मंदिर, दीवान हरिसिंह ने दिए 18,100 रुपए

मंदिर निर्माण में उस समय करीब 34,181 रुपए खर्च हुए थे। इसमें दीवान साहब हरिसिंह ने 18,100 रुपए का सहयोग दिया था, जबकि शेष राशि सिरवी समाज ने एकत्रित की थी। निर्माण कार्य की देखरेख हुकमा बाचा जी ने की थी, जबकि कारीगरी का कार्य राजस्थान के बिलाड़ा निवासी बाबा हाथा जी ने किया था। मंदिर के प्रथम पुजारी केशा बाबा जी रहे।

अखंड ज्योत में दिखती है केसरिया आभा

योगमाया मंदिर की सबसे खास पहचान अखंड ज्योत है। पुजारी पं. शर्मा ने बताया कि ये 100 साल से अधिक समय से जल रही है। मान्यता है कि सामान्य दीपक की कालिख में कार्बन होता है, जबकि इस ज्योत की कालिख में केसर जैसी छटा नजर आती है। भक्त इसे माता का आशीर्वाद मानते हैं। भक्त ज्योत के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक विरासत का प्रतीक है योगमाया मंदिर

योगमाया मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि धार्मिक परंपरा और समाज की सहभागिता का प्रतीक है। स्थापना से लेकर निर्माण तक सिर्वी समाज का योगदान रहा है। 1916 से शुरू हुई परंपरा आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। अपने इतिहास, गादी, अखंड ज्योत और मान्यताओं की वजह से ये शहर की धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

Updated on:
15 Oct 2026 02:48 pm
Published on:
15 Oct 2026 02:47 pm