जयपुर. टोंक जिले के मालपुरा उपखंड के सैकड़ों किसान अब सरसों और गेहूं जैसी पारंपरिक रबी फसलों को छोड़ मसाला फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। कलौंजी, सौंफ, जीरा, धनिया, मैथी और इसबगोल जैसी मसाला उपज न केवल खेतों में हरियाली बिखेर रही है, बल्कि किसानों की आमदनी का स्वाद भी बदल रही है। […]
जयपुर. टोंक जिले के मालपुरा उपखंड के सैकड़ों किसान अब सरसों और गेहूं जैसी पारंपरिक रबी फसलों को छोड़ मसाला फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। कलौंजी, सौंफ, जीरा, धनिया, मैथी और इसबगोल जैसी मसाला उपज न केवल खेतों में हरियाली बिखेर रही है, बल्कि किसानों की आमदनी का स्वाद भी बदल रही है। करीब 1600 हैक्टेयर (लगभग 6400 बीघा) भूमि पर मसाला फसलें लहलहा रही है। लावा, चबराना, भैरूंपुरा, कड़ीला, गुरुदयालपुरा, चावंडिया, चांदसेन और अंबापुरा सहित आसपास के कई गांवों में वातावरण इस खेती के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। आने वाले वर्षों में मालपुरा उपखंड मसाला उत्पादन के नए केंद्र के रूप में उभर सकता है।
शुरुआती वर्षों में जोखिम कम, इसलिए बढ़ा रूझान
कम पानी में पनपने वाली ये फसलें शुरुआती वर्षों में रोग-मुक्त रहने से जोखिम भी कम कर रही हैं। यही कारण है कि सरसों की तुलना में किसान अब मसाला फसलों को ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी विकल्प मानने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि मिट्टी और मौसम की अनुकूलता के कारण इन फसलों की पैदावार लगातार बेहतर हो रही है।
अच्छा भाव भी कर रहा आकर्षित
आर्थिक दृष्टि से मसाला फसलें किसानों को आकर्षित कर रही हैं। जहां सरसों का औसत भाव सात से आठ हजार रुपए प्रति क्विंटल के आसपास रहता है, वहीं कलौंजी के दाम 26 से 27 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच रहे हैं। सौंफ, धनिया और मैथी के भी बाजार में अच्छी मांग होने से अच्छे भाव है। किसानों का कहना है कि भाव में रात-दिन का अंतर देखने को मिलता है, इसलिए ये पारंपरिक फसलों से कहीं अधिक लाभकारी है।
मेहनत भी बराबर
चबराना गांव के नवाचारी किसान रामफूल गुर्जर और तिलांजू के रामकिशन जाट ने बताया कि मसाला फसलों की खेती में भी मेहनत रबी की अन्य फसलों के बराबर ही है। बुवाई, निराई-गुड़ाई और कटाई में अतिरिक्त श्रम की जरूरत नहीं पड़ती। शुरुआती वर्षों में रोग और कीट प्रकोप कम होने से दवाइयों पर होने वाला खर्च भी घट जाता है। इससे खेती की लागत कम रहती है और मुनाफा बढ़ता है।
फैक्ट फाइल....
फसल- बुवाई (हैक्टेयर में)
सौंफ-धनिया: 550
कलौंजी: 200
अजवायन-मैथी: 100
जीरा : 90
मैथा: 650
इनका कहना है....
- मालपुरा-टोडा क्षेत्र मसाला फसलों की पैदावार में नई पहचान बना रहा है। आर्थिक फसल होने से किसानों ने सरसों की जगह कलौंजी, सौंफ और मैथी और जीरे जैसी फसलों की ओर रुख किया है। सरकार की ओर से मसाला फसलों के लिए विशेष योजनाएं लागू करने से किसानों को और अधिक लाभ मिलेगा।
डाॅ. महेश कुमार कुमावत, सहायक निदेशक, कृषि विस्तार उपजिला मालपुरा