उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की सुविधा इस कदर ध्वस्त हो चुकी है की इलाज के नाम पर जिला अस्पताल की तरफ रुख करने वाले लोग काल के गाल में समाते जा रहे हैं।
बहराइच. उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की सुविधा इस कदर ध्वस्त हो चुकी है की इलाज के नाम पर जिला अस्पताल की तरफ रुख करने वाले लोग काल के गाल में समाते जा रहे हैं। यूपी में आम जन की स्वास्थ्य सुरक्षा का दावा करने वाली योगी सरकार के तमाम दावे फेल होते नज़र आ रहे है, जिसका जीता जागता प्रमाण बार्डर के जिले बहराइच में साफ देखा जा सकता है। बहराइच जिला इन दिनों इस कदर बीमारियों की मार झेल रहा है कि बीते 45 दिनों में जिला अस्पताल में इलाज के लिये आने वाले 71 बच्चों की मौत हो चुकी है। यूँ कहें तो तराई के जिले बहराइच में सिलसिलेवार हुई 71 बच्चों की मौत की घटना ने कहीं न कहीं योगी सरकार की स्वास्थ व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है।
बहराइच जिले के सरकारी अस्पताल में मासूम बच्चों का कही ज़मीन पर इलाज होता दिख रहा है, तो कहीं शवो को हाथों में उठा कर उनके परिजन लेकर जाते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं इन सब पर अस्पताल प्रशासन संसाधनों की कमी का रोना रो रहा है। साथ ही इसके लिए आस पास के जिलों के मरीजों की बड़े पैमाने पर आवक को कारण बता रहा है।बहराइच के जिला अस्पताल के इंचार्ज से लेकर आलाधिकारी भी 45 दिनों में 71 बच्चों की मौत की घटना को स्वीकार रहे हैं। इसके पीछे की वजह आस पास के जिलों गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती के अलावा नेपाल राष्ट्र के मरीजों की बढ़ती तादात व सीरियस कंडीशन में जिला अस्पताल में भर्ती होना बता रहे हैं।
जिला अस्पताल के CMS डॉ ओपी पांडेय ने बताया कि हमारा जिला अस्पताल 201 बेड का अस्पताल है, जहाँ पर आने वाले मरीजों की तादात 400 से ऊपर जा रही है। इसको लेकर मरीजों का इलाज स्ट्रेचर पर, तो कहीं गैलरी में, बेंच पर, तो कहीं रैन बसेरे में बेड लगवाकर इलाज किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला अस्पताल में बड़े पैमाने पर मैन पावर की कमी भी स्वास्थ व्यवस्थाओं के बीच में कहीं न कहीं आड़े आ रही है।