अब शाम होने पर नहीं लेना पड़ेगा तेल के दीपक और टार्च का सहारा बिजली की रोशनी में व्यवस्थित रूप से पढ़ सकेंगे आदिवासी परिवारों के विद्यार्थी 216 गांवों में 1022 बिजली कनेक्शन के लिए लाइन विस्तार कार्य भी प्रस्तावित डेढ़ करोड़ की राशि खर्च कर बिजली से रोशन किए जाएंगे गांव
जिले के नक्सल प्रभावित एवं जनजातीय बहुल ग्रामों के 403 परिवारों के घर बिजली से रोशन हुए हैं। यहां आजादी के इतने वर्षो बाद पहली बार बिजली पहुंची है। अब इन आदिवासी परिवारों के बच्चों को दिये या टार्च की रोशनी में पढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी। अन्य घरेलू व व्यवसायिक कार्य भी बिजली की रोशनी में पूरा कर सकेंगे। यह सब संभव धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान से संभव हो सका है। इन ग्रामों में विद्युतीकरण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के अधिकारी ने जिन घरों में बिजली की सुविधा नहीं है, उन घरों में बिजली की रोशनी पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
कंपनी के अधीक्षण यंत्री अमित कुमार के अनुसार जिले के नक्सल प्रभावित एवं जनजातीय गांवों की बसाहटों के अविद्युतीकृत घरों में बिजली कार्य के लिए भारत सरकार के धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत सर्वे का कार्य किया गया है। सर्वे के बाद जिले के 216 गांवों में 1022 बिजली कनेक्शन के लिए लाइन विस्तार के माध्यम से एवं 78 परिवारों में सोलर के माध्यम से बिजली की रोशनी पहुंचाने का कार्य प्रस्तावित है। इस कार्य पर 01 करोड़ 76 लाख रुपए की राशि खर्च होना है।
अमित कुमार ने बताया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत अब तक परसवाड़ा विकासखंड के ग्राम आमवाही, बडग़ांव, बारिया, चनई, डोरा, फंडकी, घोड़ादेही, केशा, खलोंडी, खर्रा, नाटा, सुकड़ी के कुल 403 जनजातीय परिवारों के घरों में विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। शेष ग्रामों में विद्युतीकरण का कार्य प्रगति पर है। इस कार्य को 30 नवंबर 25 तक विभाग द्वारा पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। दुर्गम क्षेत्र के ग्रामों तक घने वनों के बीच से बिजली की लाइन पहुंचाने का कार्य कठिन परिश्रम के साथ किया जा रहा है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र एवं जनजातीय बहुल ग्रामों के घरों में बिजली पहुंचने से हितग्राही परिवारों के घरों का अंधियारा दूर हुआ है और बिजली की रोशनी उनके जीवन को खुशहाल बना रही है। घर में बिजली पहुंचने से 403 परिवारों के जीवन में भी बदलाव आ रहा है। अब उन्हें रात के समय घर में रोशनी के लिए मिट्टी तेल या अन्य साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। बिजली पहुंचने से उनके बच्चों को रात में पढ़ाई के लिए समय और अच्छा वातावरण मिलने लगा है। बिजली की सुविधा होने से वे संचार के साधनों का भी सुगमता से उपयोग करने लगे हैं। अब उन्हें मोबाइल को चार्ज करने के लिए यहां वहां भटकना नहीं पड़ेगा।