
MP News: मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन कोई न कोई रिश्वतखोर रंगे हाथों पकड़ा जाता है। ऐसा ही मामला बालाघाट जिले से सामने आया है। जहां परिवारों के विस्थापन के मुआवजे के तौर पर राशि मांगी गई थी।
EOW के अनुसार, आवेदक ने 16 सितंबर को शिकायत की थी कि उसका वनग्राम नवेगांव कान्हा पेंच कॉरीडोर के कोर एरिया में आ गया था। यहां पर जंगली जानवरों की अधिक तदाद होने के कारण गांव के परिवारों का विस्थापन किया जा रहा है। विस्थापन के मुआवजे के तौर पर एक-एक परिवार को 15 लाख रुपए दिया जा रहा है। वन विभाग के द्वारा तैयार सूची में 5 सदस्यों को राशि मिलनी थी।
दरअसल, गांव की रहने वाली सुखवंती बाई का नाम एक साल पहले ही कमेटी द्वारा मुआवजे के लिए तय कर दिया था। उसको 5 लाख रुपए मिल गए थे। बाकी की राशि बची हुई थी। वह 3-4 महीने से आवेदक राजेन्द्र धुर्वे के साथ बिना शादी किए हुए आकर रह रही थी। इसी का फायदा उठाकर वनरक्षक मत्तम नगपुरे ने रिश्वत मांगी थी। उसका कहना था कि महिला के साथ-साथ बाकी के परिवारों का पैसा भी नहीं मिलेगा।
17 सितंबर को लालबर्रा में आरोपी के द्वारा मुआवजे की राशि का भुगतान कराने के लिए 4 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। जिसके बाद 3.50 लाख रुपए की राशि तय हुई थी। गुरुवार को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने कार्रवाई की। जिसमें आरोपी वनरक्षक को 3.50 लाख रुपए लेते स्टेट बैंक के पास रंगे हाथों पकड़ लिया गया। आरोपी के विरूद्व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन) 2018 की धारा 7 (ए) के अंतर्गत कार्रवाई की गई है।