
Balaghat Missing Son Returns: बेटे के आने से मिला नया जीवन (Photo Source - Patrika)
Police Hamdard Cell:एमपी के बालाघाट के एक घर में बुधवार को उत्सव का माहौल था। मौका था 16 साल पहले लापता हुए बेटे के घर लौटने का। इस नामुमकिन को मुमकिन बनाया तमिलनाडु से आई एक चिट्टी और बालाघाट जिला पुलिस के 'हमदर्द सेल' के प्रयासों ने। ग्राम खुर्सीपार निवासी नरेश और गीता साखरे का बेटा आशीष वर्ष 2010 में मानसिक अस्वस्थता के कारण घर से लापता हो गया था। परिजनों ने ढूंढने के हर संभव प्रयास किए लेकिन नहीं मिला। वक्त बीतने के साथ परिवार ने उम्मीदें भी छोड़ दी थीं। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनका बेटा 1500 किमी दूर तमिलनाडु के थालावड़ी पहुंच चुका है।
आशीष के मुताबिक, तमिलनाडु के थालावड़ी की संस्था में उसका इलाज चला। करीब दो साल पहले उसकी याददाश्त धीरे-धीरे वापस आने लगी। उसे अपना गांव, नानी और मां-बाप याद आने लगे। जब उसने संस्था के लोगों से घर जाने की इच्छा जताई, तो वहां के एक मददगार व्यक्ति ने आशीष के बताए पते पर एक चिट्ठी भेजी। 3 जून को जब चिट्ठी खुर्सीपार पहुंची, तो परिजन के आंसू छलक पड़े। बेटे का पता तो मिल गया, लेकिन गरीबी आड़े आ गई। परिवार इतना सक्षम नहीं था कि 1500 किमी. दूर तमिलनाडु जाकर उसे ला सके।
आशीष के माता-पिता नरेश व गीता साखरे बोले, हमें तो उम्मीद ही नहीं थी कि हमारा बेटा कभी वापस आएगा। लेकिन पुलिस ने हमारे बेटे को लाकर हमें नया जीवन दिया। उन्होंने बताया कि आशीष साखरे अपनी नानी के पास रहकर पढ़ता था। सब कुछ अच्छा था। 10वी तक पढ़ाई, फिर आईटीआई। इसके बाद नौकरी की तैयारी करने के दौरान मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। रोज सुबह घर से निकलता दिन भर इधर-उधर घूमता लेकिन शाम को घर लौट आता।
ऐसा महीनों तक चला लेकिन एक दिन ऐसा आया कि आशीष घर से तो निकला लेकिन लौटा ही नहीं। तीन दिन खोजबीन की, रिश्तेदारों से पता किया लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस के पास गए गुमशुदगी लिखवाई और इंतजार करने लगे। बेटे के इंतजार में मां की ऐसी कोई रात नहीं थी को वह बिना रोए सोई हो। कई मंदिरों में गई और मन्नतें मांगी लेकिन कोई उम्मीद नहीं मिली।
परिवार ने आपबीती जिला पुलिस को बताई। मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा, तो तुरंत हमदर्द सेल को मदद के निर्देश दिए। सेल के एएसआइ शैलेंद्र शुक्ला और दो कांस्टेबल पुलिस वाहन से परिजनों को लेकर तमिलनाडु पहुंचे। टीम से कानूनी प्रक्रिया पूरी कर आशीष को लेकर खुर्शीपार लौटी। 16 साल बाद जब मां-बाप ने बेटे को गले लगाया, तो आंखें नम हो गईं।
आशीष ने बताया कि तमिलनाडु में उसका वोटर आइडी कार्ड और अन्य जरूरी सरकारी दस्तावेज भी बन गए थे और वह वहां नियमित रूप से मतदान भी करता था।
Updated on:
19 Jun 2026, 3:21 PM IST
Published on:
19 Jun 2026, 3:21 PM IST
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