शहर में नजर आ रहा नवरात्र पर्व का उल्लास शाम ढलते ही दुल्हन की तरह नजर आ रहा शहर सार्वजनिक दुर्गा समितियों प्रतिदिन करवा रहीं विभिन्न व्यंजनों का वितरण धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सज रही महफिलें
शहर मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में पंचमी के बाद से नवरात्र पर्व का उल्लास नजर आने लगा है। शाम ढलते ही रंग बिरंगी लाइटिंगों और साज-सजावट से शहर दुल्हन की तरह सजा धजा नजर आ रहा है। भव्य और अलौकिक पंडालों में विराजित माता रानी की प्रतिमाओं के दर्शन करने बड़ी संख्या में लोग सडक़ों पर उतर रहे हंै। जगह-जगह जाम की स्थिति के बीच श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जयकारा सहित विभिन्न तरीकों से माता रानी की भक्ति में तल्लीन हैं। पूरा शहर मॉ जगत जननी की सेवा में रम गया है।
शहर के भटेरा रोड, सराफा बाजार, मेन रोड और गोंदिया रोड में नवरात्र पर्व की छटा दिखने ही बन रही है। शहर के अलावा ग्रामीण अंचलों से भी दर्शनार्थी और श्रद्धालुगण शहर मुख्यालय पहुंच रहे हैं।
शहर में बंगाली समाज ने पिछले 62 वर्षो से परंपरा का निवर्हन करते हुए इस वर्ष भी पीजी कॉलेज के समीप स्कूल मैदान में पंचमी के बंगाली दुर्गा स्थापित की है। यहां मॉ दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी के स्वरूप में विराजित किया जाता है। बंगाली समाज धरती मॉ को मॉ दुर्गा का मायका मानते हंै। इसलिए मॉ के परिवार में देवी लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिकेय और गणेश प्रतिमाएं भी स्थापित की जाती है। यह आयोजन जिले में निवासरत करीब 40 से 45 परिवार मिलकर करते हैं। यहां प्रतिदिन मेला जैसी स्थिति रहती है। बताया गया कि सन 1964 में बंगाली समाज के वरिष्ठों ने इस परंपरा की शुरूआत की थी।
शनिवार को छिंदवाड़ा जिले के चौरई से महाकाल उत्सव समिति चौरई का गु्रप शहर पहुंचा। ग्रुप के 40 से 45 सदस्यों ने एक साथ एक धुन में बड़े नंगाड़ों की आवाज में माता रानी की आराधाना करवाई। इनकी प्रस्तुति के दौरान उपस्थित हर श्रद्धालु माता रानी की भक्ति में रमा नजर आया। शहर के भटेरा रोड स्थित विंध्य वासिनी दुर्गा उत्सव समिति में करीब आधा घंटे की प्रस्तुति दी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे और अलग ही नजारा रहा।
शहर के सुभाष में सर्वोदय दुर्गा उत्सव समिति में भी रात्रि में विशेष आयोजन किया गया। यहां स्थानीय बच्चे विभिन्न देवी देवताओं की वेशभूषा में नजर आए। खासकर अर्ध नारेश्वर भगवान शिव, माता दुर्गा, मॉ काली और भगवान शिव की वेशभूषा ने सभी को आकर्षिक किया। आस पास से जाने वाले राहगीरों और चालकों ने भी कुछ समय रूककर बच्चों के रूप में भगवान के दर्शन किए और आर्शीवाद प्राप्त किया। बच्चे भी अपनी प्रस्तुति में रमें नजर आए।