9 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

पांच माह बाद भी पता नहीं चला कहां और कैसे हुई थी बाघिन की मौत

तीन दिन जंगल में घुमाने के बाद वनकर्मियों ने जलकार नष्ट किया था साक्ष्य - प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के निर्देश पर जांच कर रही एसटीएसएफ के हाथ नहीं लगे सुराग

2 min read
Google source verification
तीन दिन जंगल में घुमाने के बाद वनकर्मियों ने जलकार नष्ट किया था साक्ष्य - प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के निर्देश पर जांच कर रही एसटीएसएफ के हाथ नहीं लगे सुराग

तीन दिन जंगल में घुमाने के बाद वनकर्मियों ने जलकार नष्ट किया था साक्ष्य - प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के निर्देश पर जांच कर रही एसटीएसएफ के हाथ नहीं लगे सुराग

बालाघाट. दक्षिण वनमंडल, लालबर्रा परिक्षेत्र (कंजर्वेशन रिजर्व सोनेवानी) में जिस बाघिन के शव को जलाकर साक्ष्य नष्ट किए जाने के मामले में वन विभाग बैकफुट पर है। बालाघाट से भोपाल तक खलबली मची। वन श्रमिक से लगायत डीएफओ तक निशाने पर रहे। एसटीएसएफ की टीम जांच कर रही है। उक्त मामले के पांच माह पार हो गए, लेकिन आश्चर्य की बात है कि बाघिन की मौत कैसे और कहां हुई यह मालूम नहीं चल पाया है। इससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लाजिम है।

गौरतलब है कि दो अगस्त को सोनेवानी वन्यजीव सुरक्षा समिति के व्हाट्सअप ग्रुप में एक मृत बाघ के शव की फोटो वायरल हुई। वन महकमे की पड़ताल में पता चला कि शव जिस जगह दिखाई दे रहा है। वह लालबर्रा परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 443 है। वन विभाग की टीम वहां पहुंची तो उसे कुछ भी नहीं मिला।

प्रथम दृष्टया छह सुरक्षा श्रमिक, डिप्टी रेंजर व वनरक्षक की भूमिका संदिग्ध नजर आई। सीसीएफ गौरव चौधरी ने एसआईटी गठित की और मौके पर जांच के लिए पहुंचे। जांच में पता चला कि तीन दिनों तक शव को जंगल में घुमाने के बाद जलाकर साक्ष्य नष्ट किया गया है। शव बाघिन का था। छह वन श्रमिकों को टीम ने गिरफ्तार किया। डिप्टी रेंजर टीकाराम हनोते व फॉरेस्ट गार्ड हिमांशु घोरमारे फरार हो गए। तत्कालीन डीएफओ अधर गुप्ता व एसडीओ कटंगी की भूमिका संदिग्ध नजर आई।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव शुभरंजन सेन ने इसकी गंभीरता को देखते हुए एसटीएसएफ को जांच सौंपी। जांच टीम ने संबंधितों से पूछताछ की। आरोपी छह वन श्रमिक, डिप्टी रेंजर व फॉरेस्ट गार्ड की नौकरी चली गई। लंबे समय तक फरारी के बाद बीते माह डिप्टी रेंजर व फॉरेस्ट गार्ड गिरफ्तार हुए। सभी जेल में है। सीसीएफ ने डीएफओ गुप्ता व एसडीओ कटंगी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भी लिखा था। भोपाल से तत्कालीन डीएफओ को चार्जशीट जारी हुआ। इसबीच सामने आया कि एक फॉरेस्ट गार्ड ने आरोपी डिप्टी रेंजर को मामले की जानकारी होने की बात कही और ब्लैकमेल कर पैसे वसूल लिए। एसटीएसएफ की जांच में जब यह मामला प्रकाश में आया तो नवागत डीएफओ निथ्यानंतम एल ने उक्त फॉरेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया है।

इस संबंध में सीसीएफ चौधरी व डीएफओ निथ्यानंतम ने बताया कि बाघ की मौत कैसे और कहां हुई। यह अभी तक मालूम नहीं हो पाया है। खास है कि इस मामले की जांच करने वाली एसटीएसएफ के पास भी इसके जवाब नहीं है।