
बालाघाट. वन विभाग में इस समय वॉचटॉवर की भूमिका काफी अहम बन गई हैं। उत्तर सामान्य वनमंडल के अंतर्गत वनमंडाधिकारी के मार्गदर्शन व निर्देशन में बने वॉचटॉवर वन सम्पदा व वन्यप्राणियों की सुरक्षा की चुनौती में मददगार बने हुए हैं। खासकर वर्तमान गर्मी के समय में इस वॉच टॉवर से वन महकमा को दूर-दूर तक निगरानी करने में सहुलियत हो रही हैं। जिससे वन अपराध को रोकने में भी मदद मिल रही हैं। उत्तर सामान्य वन परिक्षेत्र लामता में भी वॉच टॉवर बने हुए हैं। जिसके माध्यम से वन व वन सम्पदा व वन्य प्राणियों को सरंक्षण मिल रहा और निगरानी भी हो रही हैं।
गर्मी के मौसम में जहां जंगल में पानी की समस्या होती हैं। वैसे ही पानी के संकट के कारण वन्य प्राणियों के भटकतें हुए ग्रामों की ओर आने या मार्ग भटकने या फिर शिकारियों के निशाने पर आने जैसी संभावना बढ़ जाती हैं। पतझड़ के कारण जंगल का घनत्व कम दिखनें लगता हैं। जिसका फायदा कथित तौर पर वन अपराध करने वाले उठाते हैं। जिसे रोकने की चुनौती होती हैं। ग्रामीणों की आवाजाही भी जंगल की ओर बढ़ जाती हैं। कई बार वे जलाऊ लकड़ी के लिए तो कई बार अन्य कारण से जंगल में प्रवेश करते हैं। जिसमें कई बार उनके बीड़ी या अन्य कारण से आगजनी की भी संभावना होती हैं। इन मुश्किल पल में वन महकमा को वॉच टॉवरों से मदद मिल रही हैं।
वन परिक्षेत्र उत्तर लामता के परिक्षेत्र अधिकारी नरेश कुमार ककोडिय़ा ने बताया कि वर्तमान में वन विभाग के लिए एक चुनौती पूर्ण समय हैं और उससे वन अमला को गुजरना पड़ रहा है। यह चुनौती इसलिए होती हैं कि अब धीरे-धीरे भीषण गर्मी का मौसम आने लगा हैं। जिससे वन्य प्राणियों को पानी की कमी की समस्या से जुझना पड़ता हैं। इसके अलावा लघुवनोपज का संग्रहण समय होने से जंगलों में ग्रामीणों की आवाजाही होगी। जिससे इस परिस्थिति में वन अपराधियों को पहचाने की चुनौती होती हैं। परंतु शासन के निर्देश पर बने वॉचटॉवर इस तरह की परिस्थितियों से निपटनें के लिए वन क्षेत्र में बनाए गए है। जिसके कारण आसानी से निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि हम सभी का यही प्रयास हैं कि वन में आग न लगे। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए काम ऐसा करें कि इससे वनसम्पदा व वन्य प्राणी भी सुरक्षित रहे। क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में वन अमला को वॉचटॉवर से निगरानी करने में मदद मिल रही हैं। बावजूद लोगों से अपील हैं कि वह वन सम्पदा व वन्य प्राणियों को किसी तरह की क्षति न पहुंचाए। अन्यथा उनके खिलाफ वन अपराध के तहत कार्रवाई की जाएगी।