उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक बेहद संवेदनशील और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने समाज में शिक्षकों के प्रति विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया है। जीराबस्ती स्थित पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय में तैनात एक शिक्षक पर अपनी ही नाबालिग छात्रा के साथ लंबे समय तक दुष्कर्म करने, उसे बहलाने-फुसलाने और डराने-धमकाने का गंभीर आरोप […]
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक बेहद संवेदनशील और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने समाज में शिक्षकों के प्रति विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया है। जीराबस्ती स्थित पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय में तैनात एक शिक्षक पर अपनी ही नाबालिग छात्रा के साथ लंबे समय तक दुष्कर्म करने, उसे बहलाने-फुसलाने और डराने-धमकाने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, आरोपी शिक्षक नित्यानंद उपाध्याय (33 वर्ष) मूल रूप से अंबेडकरनगर जिले के राजे सुल्तानपुर थाना क्षेत्र का निवासी है। वह लगभग चार वर्ष पूर्व इस केंद्रीय विद्यालय में स्थायी शिक्षक के रूप में नियुक्त हुआ था। उस समय पीड़ित छात्रा मात्र पांचवीं कक्षा में पढ़ रही थी। आरोप है कि शिक्षक ने शुरुआत में पढ़ाई में मदद और अतिरिक्त मार्गदर्शन के बहाने छात्रा से निकटता बढ़ाई। धीरे-धीरे उसने उसे अपने विश्वास में ले लिया और शारीरिक शोषण शुरू कर दिया। वह छात्रा को बार-बार धमकाता रहा कि यदि उसने किसी को इस बारे में बताया तो उसके साथ बुरा अंजाम होगा। यह सिलसिला लगभग चार साल तक जारी रहा, जिस दौरान छात्रा अब आठवीं कक्षा में पहुंच चुकी है। मामला तब प्रकाश में आया जब आरोपी शिक्षक की कहीं और शादी तय हो गई। छात्रा को इसकी जानकारी मिलते ही उसने शिक्षक पर खुद से शादी करने का दबाव बनाना शुरू किया। जब शिक्षक ने इससे इनकार किया, तो छात्रा ने परिजनों को पूरी घटना बता दी। परिजनों ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
सुखपुरा थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और गुरुवार को आरोपी शिक्षक नित्यानंद उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया। एसपी ओमवीर सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।यह घटना न केवल गुरु-शिष्य के पवित्र संबंध को कलंकित करती है, बल्कि स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। समाज में इस तरह की घटनाओं पर कड़ी नजर रखने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।