Ballia Police: विवेचना के दौरान चार्जशीट दाखिल करने और मुकदमे की धाराएं बनाए रखने के नाम पर रिश्वत लेना एक उपनिरीक्षक को महंगा पड़ गया। साक्ष्यों के आधार पर आरोप सही पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के निर्देश पर बांसडीह रोड थाने में तैनात उपनिरीक्षक रमाशंकर यादव को निलंबित कर दिया गया है। […]
Ballia Police: विवेचना के दौरान चार्जशीट दाखिल करने और मुकदमे की धाराएं बनाए रखने के नाम पर रिश्वत लेना एक उपनिरीक्षक को महंगा पड़ गया। साक्ष्यों के आधार पर आरोप सही पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के निर्देश पर बांसडीह रोड थाने में तैनात उपनिरीक्षक रमाशंकर यादव को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
जानकारी के अनुसार आरोपित उपनिरीक्षक मूल रूप से जौनपुर जनपद का निवासी है और वर्तमान में वाराणसी में रहता है। वर्ष 2024 में उसकी तैनाती बांसडीह रोड थाने पर हुई थी। यहां वह एक आपराधिक मुकदमे की विवेचना कर रहा था। आरोप है कि विवेचना के दौरान मुकदमे की धाराएं न हटाने और समय से चार्जशीट दाखिल करने के बदले उसने वादी से अलग-अलग किश्तों में अपने बेटे के बैंक खाते में धनराशि मंगवाई।
बताया जा रहा है कि उपनिरीक्षक ने वादी को यह भरोसा दिलाया था कि मुकदमे की गंभीर धाराएं यथावत रखी जाएंगी। इसी बीच मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब दूसरे पक्ष ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की। जांच के आदेश मिलने के बाद उपनिरीक्षक ने कथित रूप से मुकदमे से कुछ धाराएं हटा दीं। आशंका है कि कार्रवाई के डर से उसने रिश्वत की कुछ रकम वापस भी कर दी।
इस वादाखिलाफी से आहत वादी ने साक्ष्यों के साथ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। शिकायत में बैंक लेन-देन का विवरण और बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग भी सौंपी गई। मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) द्वारा की गई, जिसमें प्रारंभिक स्तर पर ही रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से उपनिरीक्षक को निलंबित कर दिया। वहीं, शिकायतकर्ता द्वारा तहरीर न देने की स्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए थानाध्यक्ष वंश बहादुर सिंह स्वयं वादी बने और आरोपित उपनिरीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया। थानाध्यक्ष ने मामले में विधिक कार्रवाई की पुष्टि की है।