बलिया

रेफर होने के बाद भी एंबुलेंस के लिए घंटों तड़पती रही सड़क हादसे में घायल वृद्धा, स्वास्थ्य सुविधाओं की खुली पोल

​ ​Ballia News: बलिया जनपद के उभांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत तेलमाजमालुद्दीनपुर चट्टी पर हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में 75 वर्षीया वृद्धा गंभीर रूप से घायल हो गईं। दुर्घटना के बाद उन्हें सीयर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। […]

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Mar 03, 2026



​Ballia News: बलिया जनपद के उभांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत तेलमाजमालुद्दीनपुर चट्टी पर हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में 75 वर्षीया वृद्धा गंभीर रूप से घायल हो गईं। दुर्घटना के बाद उन्हें सीयर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की बदइंतजामी का आलम यह रहा कि रेफर होने के बावजूद घायल वृद्धा घंटों तक एंबुलेंस के इंतजार में अस्पताल में ही तड़पती रही। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग के 'त्वरित एंबुलेंस सेवा' के दावों की पोल खोलकर रख दी है।


​युवक ने दिखाई इंसानियत, पहुंचाया अस्पताल


जानकारी के अनुसार, पड़सरा निवासी 75 वर्षीया शाहजहां (पत्नी अकबर कुरैशी) तेलमाजमालुद्दीनपुर चट्टी के पास एक तेज रफ्तार चार पहिया वाहन की चपेट में आ गईं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वह छिटक कर दूर जा गिरीं। मौके पर मौजूद मोलनापुर निवासी युवक सतेंद्र प्रसाद ने इंसानियत का फर्ज निभाते हुए घायल वृद्धा को तुरंत सीयर सीएचसी पहुंचाया और उनके परिजनों को घटना की सूचना दी।


​सिर में गंभीर चोट, कान से बह रहा था खून


सीएचसी में इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. विकास वर्मा ने घायल महिला का प्राथमिक उपचार किया। डॉ. वर्मा ने बताया कि वृद्धा के सिर में गंभीर चोट (हेड इंजरी) थी और कान से लगातार रक्तस्राव हो रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तत्काल बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।


​घंटों इंतजार, नहीं आई एंबुलेंस


अस्पताल में सूचना पाकर बदहवास हालत में पहुंचीं घायल वृद्धा के घर की एक महिला ने एंबुलेंस सेवा की बदहाली पर रोष जताया। उसने बताया कि वे दो से तीन घंटे से अस्पताल में मौजूद हैं। मरीज रेफर हो चुका है, उनका आगे-पीछे कोई मजबूत सहारा नहीं है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई है।


​परसडा नदौली ताजपुर निवासी नफीस आलम कुरैशी ने भी इस व्यवस्था पर गहरा दुःख जताया। उन्होंने कहा कि सीयर सीएचसी में इमरजेंसी के दौरान डॉक्टरों द्वारा दी गई त्वरित चिकित्सा व्यवस्था सराहनीय रही, लेकिन हायर सेंटर ले जाने के लिए एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा में हो रही यह देरी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है।



​कागजों पर दौड़ती एंबुलेंस और 'गोल्डन आवर' की अनदेखी


सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों के लिए शुरुआती एक घंटा यानी 'गोल्डन आवर' जीवन और मृत्यु के बीच का फासला तय करता है। सीयर सीएचसी की इस घटना ने साबित कर दिया है कि करोड़ों रुपये के बजट और 'कुछ ही मिनटों में पहुंचने' का दावा करने वाली एंबुलेंस सेवाएं आज भी कागजों पर ही ज्यादा दौड़ रही हैं। एक 75 वर्ष की बुजुर्ग महिला, जिसके सिर में गंभीर चोट है और कान से खून बह रहा है, उसे रेफर करने के बाद घंटों एंबुलेंस न मिलना केवल एक लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की मुस्तैदी तब तक बेमानी है, जब तक कि गंभीर मरीजों को हायर सेंटर तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाने का मजबूत ट्रांसपोर्ट सिस्टम न हो। स्वास्थ्य महकमे के उच्चाधिकारियों को इस घटना का संज्ञान लेते हुए एंबुलेंस सेवाओं की जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि भविष्य में मरीज की सांसें एंबुलेंस के इंतजार में न टूटें।

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