भोजपुरी स्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने काराकाट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया है। उन्होंने वैवाहिक स्थिति में खुद को 'परित्यक्त नारी' बताया और पति वाले कॉलम में पवन सिंह का नाम छोड़ सिर्फ 'ख्याति प्राप्त भोजपुरी कलाकार' लिखा, जिससे सोशल मीडिया पर हलचल मच गई।
Jyoti Singh: भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने बिहार के काराकाट विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। दिलचस्प बात यह है कि अपने चुनावी हलफनामे में उन्होंने वैवाहिक स्थिति के कॉलम में खुद को ‘परित्यक्त नारी’ लिखा है। वहीं, पति के नाम वाले कॉलम में उन्होंने पवन सिंह का नाम न लिखते हुए केवल ‘ख्याति प्राप्त भोजपुरी कलाकार’ का उल्लेख किया है।
Jyoti Singh: चुनावी हलफनामे में ज्योति सिंह ने अपने पति भोजपुरी स्टार पवन सिंह का नाम नहीं लिखा है। उनके इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब तक अदालत से तलाक की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। तब तक पति का नाम न लिखना क्या नियमों के तहत सही है? कई यूजर्स ने टिप्पणी की कि यह कदम उनकी स्वतंत्र पहचान और राजनीतिक स्वायत्तता दिखाने की कोशिश हो सकता है। वहीं, कुछ ने इसे जानबूझकर उठाया गया राजनीतिक कदम बताया।
‘परित्यक्त नारी’ शब्द का अर्थ है — वह महिला जिसे उसका पति त्याग दे या छोड़ दे। लेकिन कानूनी रूप से तलाक न हुआ हो। यानी ऐसी स्त्री जो अब अपने पति से अलग रहती है। परंतु विवाह का बंधन अब भी कानूनी तौर पर बना रहता है। इस स्थिति में महिला का सामाजिक और कानूनी दर्जा जटिल हो जाता है। क्योंकि वह न तो विवाहित मानी जाती है, न तलाकशुदा।
बताया जा रहा है कि ज्योति सिंह और पवन सिंह के बीच लखनऊ में विवाद होने के बाद दोनों के रिश्तों में खटास आ गई थी। ज्योति सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया की रहने वाली हैं। पवन सिंह ने अपनी पहली पत्नी की मृत्यु के बाद ज्योति सिंह से विवाह किया था। अब जब ज्योति ने चुनावी मैदान में उतरकर पवन सिंह से दूरी का संकेत दिया है, तो यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
हलफनामे में ज्योति सिंह ने अपनी चल-अचल संपत्तियों का विवरण भी दिया है। अब सोशल मीडिया पर यह बहस शुरू हो गई है कि ये संपत्तियां उन्होंने स्वयं अर्जित की हैं, मायके से मिली हैं या फिर पवन सिंह से जुड़े संसाधनों से प्राप्त हुई हैं। जानकारों का कहना है कि इन विवरणों का असर उनके द्वारा दायर किए गए मेन्टेनेंस केस पर भी पड़ सकता है।
ज्योति सिंह का नामांकन न केवल काराकाट सीट के लिए राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। बल्कि यह कदम वैवाहिक रिश्तों और महिला की स्वतंत्र पहचान पर भी नई बहस छेड़ गया है।