
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ के PGI में निधन हो गया। वह कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। PGI निदेशक डॉ. आरके धीमान ने उनके निधन की पुष्टि की है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, "समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी जी का निधन अत्यंत दुःखद है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल दें। भावपूर्ण श्रद्धांजलि।"
वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस नेता ललन कुमार ने भी रामगोविंद चौधरी के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि उनका जाना प्रदेश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों व समर्थकों को यह दुःख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
राम गोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे। वह आठ बार विधायक चुने गए। वर्ष 2017 से 2022 तक वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे। उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में 27 मार्च 2017 से नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनका नाम दर्ज है।
राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह छात्रसंघ की राजनीति से जुड़े। बाद में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में सक्रिय रहे और आपातकाल के दौरान जेल भी गए। चौधरी का जन्म बलिया के गोसाईपुर गांव में 7 सितंबर 1953 को हुआ था। उन्होंने स्नातक के बाद एलएलबी की पढ़ाई की और पेशे से अधिवक्ता रहे।
राम गोविंद चौधरी ने 1977 में चिलकहर विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीता। इसके बाद 1980, 1985, 1989 और 1991 में भी वह विधानसभा पहुंचे।बाद में उन्होंने बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से चुनावी राजनीति की। विधानसभा के रिकॉर्ड में उनके आठ कार्यकाल दर्ज हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी ने बांसडीह सीट से एक बार फिर सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस बार उन्हें भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन की प्रत्याशी केतकी सिंह से हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में बांसडीह सीट पर पहली बार भाजपा की जीत हुई और चौधरी का विधानसभा का लंबा राजनीतिक सफर थम गया।