बलिया

शुभेंदु अधिकारी PA हत्याकांड: राज को राजकुमार समझ बैठी पुलिस, बेटे को गले लगाकर फूट-फूटकर रोई मां, बोली- मेरी परवरिश ऐसी नहीं

Suvendu Adhikari PA Murder Case: पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी के पीए हत्याकांड मामले में यूपी के राज सिंह को पुलिस ने गलत पहचान में उठा लिया। 10 दिन तक कस्टडी, पूछताछ और डर के बीच फंसे रहे राज को आखिरकार CCTV फुटेज और एक कुर्ते की रसीद ने बेगुनाह साबित कर दिया।

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May 22, 2026
बलिया का राज सिंह जेल से रिहा।

Suvendu Adhikari PA Murder Case: "अगर सीबीआई वक्त पर नहीं पहुंचती, तो शायद मेरा फर्जी एनकाउंटर कर दिया जाता। मुझे वहां की भाषा समझ नहीं आती थी और हर समय जान जाने का डर बना रहता था।' यह कहते-कहते बलिया के रहने वाले राज सिंह भावुक हो गए, जो महज गलत पहचान की वजह से 10 दिन तक कस्टडी में रहे। गुरुवार को बेगुनाह साबित होने के बाद वह अपने घर लौटे।

दरअसल, पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में एसओजी ने 11 मई को राज सिंह को अयोध्या से संदिग्ध शूटर मानकर उठा लिया था।

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फेसबुक रील बनी मुसीबत

पूरे मामले की शुरुआत बक्सर से हुई गिरफ्तारी से हुई। कोलकाता पुलिस ने पहले विक्की मौर्य और मयंक मिश्रा नाम के दो आरोपियों को पकड़ा। पूछताछ के दौरान मिले इनपुट और सोशल मीडिया पर मौजूद फेसबुक रील्स के आधार पर पुलिस का शक राज सिंह पर गया। अयोध्या पुलिस की मदद से राज सिंह को हिरासत में लिया गया और फिर बंगाल पुलिस अपने साथ ले गई। बाद में सीबीआई ने मुजफ्फरनगर के छपार टोल प्लाजा से असली आरोपी राजकुमार सिंह को गिरफ्तार किया। इसके बाद जांच का पूरा रुख बदल गया और राज सिंह को बेगुनाह मानते हुए रिहाई मिल गई।

बेगुनाह साबित होने के बाद अपने घर लौटे राज सिंह ने बताया कि मेरा इस केस से कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन कोई मेरी सुनने को तैयार नहीं था। बार-बार डराया जा रहा था। कहा जा रहा था- बता तूने कैसे किया? राज सिंह का आरोप है कि गलत पहचान की वजह से उन्हें ऐसी सजा मिली, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि अगर सीबीआई समय पर जांच में नहीं आती, तो शायद उनका एनकाउंटर कर दिया जाता।

बक्सर से हुई गिरफ्तारी, फिर राज सिंह तक पहुंची पुलिस

दरअसल, कोलकाता पुलिस ने अयोध्या पुलिस की मदद से राज सिंह को गिरफ्तार किया था। इससे पहले पुलिस ने बक्सर से विक्की मौर्य और मयंक मिश्रा नाम के दो आरोपियों को पकड़ा था। पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर फेसबुक रील बनाने वाले राज सिंह को संदिग्ध मान लिया गया।

बाद में सीबीआई ने मुजफ्फरनगर के छपार टोल प्लाजा से असली आरोपी राजकुमार सिंह को गिरफ्तार किया। इसके बाद जांच का पूरा रुख बदल गया और राज सिंह को बेगुनाह मानते हुए कोर्ट से रिहाई मिल गई।

‘गोली मारने की धमकी देते थे’

रिहा होने के बाद राज सिंह ने बताया कि कस्टडी के दौरान उन पर लगातार दबाव बनाया गया। उन्हें डराया जाता था कि गोली मार दी जाएगी। उन्होंने हाथ जोड़कर सीबीआई का धन्यवाद करते हुए कहा कि एजेंसी की निष्पक्ष जांच की वजह से ही आज वह अपने परिवार के बीच वापस लौट सके हैं।

CCTV फुटेज और कुर्ते की रसीद बनी सबसे बड़ा सबूत

राज सिंह के मुताबिक, परिवार ने उनके बचाव में कई अहम सबूत जुटाए। घर के सीसीटीवी फुटेज और ड्रेस लैंड से खरीदे गए कुर्ते की रसीद ने उनकी बेगुनाही साबित करने में बड़ी भूमिका निभाई। गुरुवार को जैसे ही वह घर पहुंचे, मां से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़े।

मां बोलीं- लोग मेरी परवरिश पर सवाल उठा रहे थे

राज सिंह की मां जामवंती सिंह ने कहा कि मैं बता नहीं सकती कि इन 11-12 दिनों में मैंने क्या झेला है। हर जगह जाकर लोगों से कहती रही कि मेरा बेटा निर्दोष है। सबूत जुटाती रही, अधिकारियों के सामने हाथ जोड़ती रही, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था।

उन्होंने अयोध्या एसओजी पर भी गंभीर आरोप लगाए। कहा कि उन्हें और उनके बेटे को बिना पूरी जांच के परेशान किया गया। महिला पुलिसकर्मी तक साथ नहीं थी और उन्हें जबरन गाड़ी में बैठाकर महिला थाने ले जाया गया।

जामवंती सिंह ने कहा कि लोग मेरे दूध और परवरिश पर सवाल उठा रहे थे। कहते थे कि बेटे को बिगाड़ दिया। लेकिन आज सच सामने आ गया। भगवान राम ने न्याय किया। एक मां अपने बेटे के लिए क्या महसूस करती है, इसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने सीबीआई अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच की वजह से उनके बेटे की जिंदगी और परिवार की इज्जत दोनों बच गईं।

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Updated on:
22 May 2026 11:31 am
Published on:
22 May 2026 10:01 am
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