रेलवे कॉलोनी में चला जेसीबी छिन गया बेसहारों का आशियाना

दल्लीराजहरा रेलवे प्रबंधन ने शनिवार को अपने जर्जर व खंडहरनुमा आवासों को तोडऩे की कार्रवाई शुरू कर दी। इसके तहत 5 जर्जर आवासों को तोड़ा गया।

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Jan 08, 2017
Balod : Railway colony ravaged houses demolished by JCB
बालोद/दल्लीराजहरा.स्थानीय रेलवे प्रबंधन के द्वारा अपने जर्जर व खंडहरनुमा आवासों को तोडऩे की कार्रवाई की जा रही है, जिससे वहां कई महीनों से गुजर-बसर कर रहे गरीब तबके की पांच महिलाओं के परिवारों को नगर पालिका ने वार्ड- 26 में बने सामुदायिक भवन में ठिकाना दिलाया। स्थानीय रेलवे कालोनी में रेलवे विभाग के द्वारा कुछ दिनों से अपने वर्षों
पुराने जर्जर एवं खंडहर हो चुके आवासों को धराशाई करने की कार्रवाई की जा
रही है।

खाली करने दी थी चेतावनी
इसी कड़ी में रेलवे के स्थानीय अधिकारियों ने बीते शाम के समय उक्त आवासों में कब्जा कर कई महीनों से रह रहे विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को यह आवास तोड़े जाने की जानकारी दी थी, और रात तक अपना सामान बाहर निकालकर रेलवे का जर्जर आवास खाली करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद अधिकारी शनिवार सुबह 9 बजे जेसीबी के साथ आवास को तोडऩे के लिए पहुंचे और अपना काम शुरू कर दिया।

युवकों ने बाहर निकाल सुरक्षित रखा सामान
आवासों पर जेसीबी मशीन चलने की खबर पाते ही रेलवे क्वार्टर के पीछे वार्ड क्रमांक 26 के झुग्गी बस्ती में रहने वाले कुछ युवकों एवं बड़े बजुर्गो ने मौके पर आकर रेलवे अधिकारियों से गरीब महिलाओं को अपना सामान हटाने के लिए समय देने की मांग की, लेकिन अधिकारियों ने उनके निवेदन को ठुकराते हुए हर हालत में तोड़े जाने की बात कही। जिसके बाद युवकों ने महिलाओं के सामानों को मकान से निकालकर उनके क्षेत्र में पेड़ के नीचे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

घर-दुकान में कर रही झाड़ू-पोछा का काम
उक्त आवासों को तोड़े जाने से प्रभावित एवं पीडि़त विधवा बुजुर्ग शंकरम्मा अपने 22 वर्षीय बेटी के साथ बेघर हो गई है। इसी तरह परित्यक्ता लक्ष्मी भी अपने 11 वर्षीय बेटे के साथ बेघर हुई है, साथ ही परित्यक्ता 33 वर्षीय पुष्पा, परित्यक्ता 65 वर्षीय सावित्री एवं परित्यक्ता सुमित्रा का भी आशियाना छीन गया है। इनमें सुमित्रा को न तो पेंशन मिलता है और न ही गरीबी रेखा सूची में उसका नाम है, जिससे उसकी परेशानियां और भी बढ़ गई है।

बिजली विहीन मकानों में रह रहे थे
प्रभावित महिलाओं ने बताया कि राजहरा नगर में इनके पास कहीं भी रहने की और कोई जगह या मकान नहीं है, इसीलिए वे कई महीनों से रेलवे के इन खंडहरनुमा एवं बिजली विहीन मकानों में रह रहे थे। आसपास के घरों व दुकानों में झाड़ू पोंछा और बर्तन मांजने धोने का काम करते हुए जीवन यावन कर रही हैं। अब इन मकानों को तोड़ जाने से अब उन्हें दूसरा घर तलाश करना पड़ेगा। इनमें से दो परिवार को पालिका ने ठिकाना दिया।

रेलवे प्रबंधन का अमानवीय पहल
दल्लीराजहरा नगर पालिका अध्यक्ष कांशीराम निषाद ने कहा रेलवे प्रबंधन ने जिन परिवारों को हटाया है, वे बहुत ही गरीब तबके के लोग हैं। प्रबंधन को चाहिए था कि वह उन लोगों को अपनी व्यवस्था के लिए समय देता उसके पश्चात मकान को तोड़ता। रेलवे प्रबंधन का यह अमानवीय पहल है, जिसका नगर पालिका विरोध करती है। चूंकि नगर पालिका के पास अपनी कोई भी जमीन नहीं है, फिर भी पालिका द्वारा वार्ड-26 में बने सामुयादिक भवन में दो परिवार के लोगों को जगह दी गई है।
Published on:
08 Jan 2017 10:52 am
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