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Bankipur By Election: “जीत का दावा, फिर जातीय सम्मेलन क्यों?” बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने बीजेपी को घेरा

Bankipur By Election: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब बीजेपी और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। अपनी पारंपरिक सीट बचाने के लिए बीजेपी ने सांसदों, मंत्रियों, करीब 50 विधायकों, संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) तक को चुनावी मैदान में उतार दिया है।
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पटना

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Rajesh Kumar Ojha

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Updated: 21 Jul 2026, 5:24 PM IST

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चुनाव प्रचार करते बीजेपी प्रत्याशी नीरज सिन्हा

Bankipur By Election: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब बीजेपी और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। राजधानी पटना की इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए दोनों पक्षों ने पूरी ताकत झोंक दी है। हालांकि यह सीट लंबे समय से बीजेपी का गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने के बाद मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यही वजह है कि बीजेपी ने जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने संगठन, जनप्रतिनिधियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) तक को चुनावी अभियान में सक्रिय कर दिया है। पार्टी के सांसद, विधायक और मंत्री लगातार क्षेत्र में प्रचार कर रहे हैं। चुनावी रणनीति के तहत पूरे विधानसभा क्षेत्र को करीब 60 शक्ति केंद्रों में बांटकर अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

प्रशांत किशोर ने बीजेपी की चुनावी रणनीति पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग कभी बांकीपुर को अपनी जागीर समझते थे, वे आज जीत सुनिश्चित करने के लिए घर-घर घूम रहे हैं और जातीय सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं।

विधायकों को सौंपी गई जिम्मेदारी

बीजेपी ने चुनावी अभियान को धार देने के लिए करीब 50 विधायकों को अलग-अलग वार्डों और शक्ति केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी है। सभी विधायक स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं और मतदाताओं से बीजेपी के पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं। इसके अलावा वे चुनावी तैयारियों की समीक्षा, बूथ प्रबंधन को मजबूत करने और रोजाना पार्टी नेतृत्व को फीडबैक देने का भी काम कर रहे हैं।

इन नेताओं की जिम्मेदारी सिर्फ प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि हर बूथ की तैयारियों की निगरानी करना, घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करना और मतदान के दिन अधिक से अधिक समर्थकों को बूथ तक पहुंचाना भी उनके कार्यों में शामिल है। इसी कारण चुनाव तक वे लगातार प्रत्येक परिवार से संपर्क बनाए रखने और मतदाताओं के साथ अपने संबंध मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

जातीय और सामाजिक समीकरण साधने में जुटी बीजेपी

बीजेपी चुनाव में सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए पार्टी ने पूरे विधानसभा क्षेत्र के मोहल्लों का सर्वे कराया है और उसी के आधार पर नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां तय की हैं। विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक वैश्य मतदाता हैं। इन्हें साधने के लिए पार्टी ने वैश्य समाज से आने वाले मंत्री, विधायक और सांसदों को प्रचार में लगाया है, ताकि इस वोट बैंक में किसी तरह की सेंध न लग सके। वहीं, नाराज भूमिहार मतदाताओं को मनाने के लिए पटना के एक होटल में सम्मेलन आयोजित किया गया, जहां उनकी समस्याएं सुनी गईं और उन्हें चुनावी जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं।

इसी तरह कायस्थ, ब्राह्मण, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और अन्य समाजों के बीच भी उसी वर्ग के प्रभावशाली नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है। पार्टी का मानना है कि स्थानीय स्तर पर सीधे संवाद के जरिए मतदाताओं तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा बीजेपी ने महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, पिछड़ा मोर्चा और अल्पसंख्यक मोर्चा समेत अपने सभी संगठनात्मक प्रकोष्ठों को भी पूरी तरह चुनावी अभियान में सक्रिय कर दिया है।