जिले के ग्राम बिरेतरा में एक कार्यक्रम के दौरान हैलोजन लाइट से निकली गैस के संपर्र्क में आने से वहां मौजूद 500 लोगों की आंखों में संक्रमण फैल गया। इनमें करीब 2 सौ बच्चे भी प्रभावित हैं। घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने नेत्र विशेषज्ञों समेत 22 सदस्यीय चिकित्सक दल गांव भेजा है। वहां शिविर लगाकर पीडि़तों का इलाज किया गया। इस दौरान विधायक भैयाराम सिन्हा व तहसीलदार एआर राणा के साथ जनपद पंचायत बालोद के अधिकारी भी गांव में पहुंचे और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। चिकित्सकों के मुताबिक गांव में पीडि़तों की स्थिति सामान्य है।
गांव में रिकॉर्डिंग डांस कार्यक्रम
जानकारी के अनुसार गणेश प्रतिमा विसर्जन के बाद शुक्रवार देर रात 11 बजे गांव में रिकॉर्डिंग डांस कार्यक्रम चल रहा था। कार्यक्रम रात 12 बजे तक चला। इस बीच मंच की हैलोजन लाइट से हलका धुआं (गैस) निकलने लगा। इस धुएं ने लोगों को चपेट में ले लिया। आंखों में जलन होने लगी।
शासकीय चिकित्सक एसके सोनी ने कहा कि यह केमिकल एलर्जी के कारण हुआ है। हैलोजन लाइट जल रहा था। तब उसमें खेतों में जहरीले कीड़े आकर बैठे और वह जल गए। इससे निकला धुआं वहां मौजूद लोगों की आंखों में गया। सभी लोगों में एलर्जी के लक्षण पाए गए हैं।
तहसीलदार एआर राणा ने बताया कि लोगों की आंखों में संक्रमण हुआ है। प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग का कैम्प लगाया गया है, जहां सभी पीडि़तों का इलाज किया गया। सभी की हालत अब सामान्य है। हर प्रकार की सुविधाएं मरीजों को दी जा रही हैं।

आंखफोड़वा कांड की याद
बता दें कि बालोद में ही साल 2010-11 में सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में नेत्र शिविर लगाकर ग्रामीणों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशेन के बाद पांच लोगों की मौत और 41 लोगों की आंखों की रौशनी चली गई थी। इस दुर्घटना के बाद यह बालोद आंखफोड़वा कांड के नाम पूरे प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया था। इस कांड के बाद राज्य सरकार ने शिविरों के अलावा सरकारी अस्पतालों में भी नेत्र ऑपरेशन पर कुछ दिनों तक रोक लगा दी थी।
कल्याण कालेज के रसायन शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डीएन शर्मा ने बताया कि हैलोजन बल्ब के भीतर ब्रोमीन और आयोडीन गैस होती है इसका तापमान 400 से 500 डिग्री सेंटीग्रेड़ होता है गैस का दबाव वायुमंडल के मुकाबले से चार से पांच गुणा ज्यादा होता है। जब यह फटता या लीक होता है तो वहां से निकलने वाली गैस सीधे नाक और आंख पर असर करती है। इसके संपर्क में आने के बाद आंखोंं में जलन, चुभन जैसी परेशानी शुरू हो जाती है। ज्यादा मात्रा में लीक होने पर यह नाक के जरिए फेफड़े तक पहुंचकर ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।