
Balod Cancer patients: कहते हैं शिक्षक अंधेरे में रोशनी दिखाता है। लेकिन डौंडी लोहारा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका एनुका शार्वा ने रोशनी सिर्फ क्लासरूम में ही नहीं, बल्कि उन जिंदगियों में भी की है, जहां कैंसर के नाम से ही अंधेरा छा जाता है। खुद कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझकर जंग जीतकर लौटीं। अब आठ सालों से जिले में कैंसर पीडि़तों के लिए उम्मीद की किरण बनी हुई हैं।
उनकी कहानी प्रेरणा से कम नहीं है। जब कैंसर का पता चला तो जीवन थम सा गया था। लंबा इलाज, कीमोथेरेपी का असहनीय दर्द, बालों का झडऩा और मानसिक तनाव। उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार के सहयोग और अपने साहस से कैंसर को मात दी। ठीक होने के बाद उन्होंने सोचा कि दूसरी जिंदगी सिर्फ अपने लिए नहीं, उन लोगों के लिए है, जो आज भी इस बीमारी से अकेले लड़ रहे हैं।
वे एक शिक्षिका के साथ सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही हैं। जिला रेडक्रॉस प्रबंधन समिति की सक्रिय सदस्य के रूप में वे जिले के कोने-कोने में कैंसर जागरूकता की अलख जगा रही हैं। स्कूल-कॉलेज की छात्राओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, महिला स्व-सहायता समूहों और मोहल्ला बैठकों में जाकर वे कैंसर के लक्षण, समय पर जांच और इलाज के बारे में बताती हैं। साइकिल रैली निकालकर लोगों को जागरूक करती हैं। अब तक 50 से 52 से अधिक महिलाओं की व्यक्तिगत रूप से काउंसलिंग कर चुकी हैं, उनके घर जाकर उनका मनोबल बढ़ाया है और उन्हें बताया है कि कैंसर का मतलब मौत नहीं है।
उनकी इस निस्वार्थ सेवा का सबसे मार्मिक असर उनके अपने परिवार में देखने को मिला। उनकी भांजियों खुशी साहू और मौली साहू ने अपनी मौसी को इतने सालों से दूसरों के लिए काम करते देखा तो उनके मन में भी सेवा का भाव जागा। दोनों छात्राओं ने अपने कमर तक लंबे, घने और सुंदर बालों को बिना किसी हिचकिचाहट के काटकर दान कर दिया। दोनों ने अपने केश तमिलनाडु की सामाजिक संस्था हेयर क्राउन' को डाक के माध्यम से भेजा है। संस्था दान किए गए बालों से कैंसर पीडि़तों के लिए नि:शुल्क विग तैयार करती है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि दान किए बालों से बना विग मरीज को सिर्फ सुंदरता ही नहीं देता, बल्कि उसे समाज में फिर से पूरे आत्मविश्वास के साथ खड़े होने की हिम्मत देता है।
वे जानती हैं कि कीमोथेरेपी के दौरान महिला के बाल झड़ते हैं तो सिर्फ बाल नहीं झड़ते, उसका आत्मविश्वास, सुंदरता का अहसास भी बिखर जाता है। इसी दर्द को समझते हुए उन्होंने केशदान अभियान शुरू किया। वे खुद अपने बाल दान करती हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करती हैं। अब तक जिले के 10 से अधिक लोगों से केशदान करा चुकी हैं और यह अभियान लगातार जारी है।